ग्वालियर/श्योपुर। मध्यप्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत अनियमित बीमा भुगतान की जांच में एक संगठित घोटाले का पर्दाफाश किया है।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा घोटाला
ग्वालियर/श्योपुर। मध्यप्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत अनियमित बीमा भुगतान की जांच में एक संगठित घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट ने बेहद चौंकाने वाली सटीकता के साथ मृत्यु अभिलेखों, बैंकिंग चैनलों और बीमा दावों में हेरफेर कर गरीबों के लिए निर्धारित करोड़ों रुपये की रकम हड़प ली। जांच में सामने आया कि जिंदा लोगों को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और कुछ मामलों में मृत व्यक्तियों को जीवित दिखाया गया, ताकि बीमा राशि का भुगतान कराया जा सके।
घोटाले के केंद्र में ये--
इस घोटाले के केंद्र में दीपमाला मिश्रा, जिग्नेश प्रजापति, नवीन मित्तल और पूजा कुमारी बताए जा रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर ग्वालियर नगर निगम के जन्म–मृत्यु पंजीकरण शाखा के पूर्व कर्मचारियों और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, श्योपुर शाखा के कुछ अधिकारियों का सहयोग मिला।
क्या है कार्यप्रणाली (मोडस ऑपरेंडी)-
जांचकर्ताओं के अनुसार, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इन दस्तावेज़ों को बैंक शाखाओं और बीमा कंपनियों के माध्यम से आगे बढ़ाकर प्रति मामले ₹2 लाख (PMJJBY के तहत बीमित राशि) का भुगतान कराया गया। यह रकम, जो किसी कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के बाद परिवार को सहारा देने के लिए होती है, चुपचाप रैकेट के सदस्यों और उनके सहयोगियों तक पहुंचा दी गई।
मामले में पहला सुराग-
पहला बड़ा खुलासा श्योपुर जिले में हुआ, जहां स्टार यूनियन दाइ-इचि लाइफ इंश्योरेंस के दावों में अनियमितताएं पाई गईं। जांचे गए 50 दावों में से 6 की गहन जांच की गई। केवल एक दावा वास्तविक निकला। शेष पांच मामलों में जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर ₹2 लाख प्रति दावा का भुगतान कराया गया। सिर्फ इन पांच मामलों में ही ₹10 लाख का नुकसान सामने आया। अधिकारियों का मानना है कि यह कुल घोटाले का एक छोटा सा हिस्सा है।
जांच का दायरा बढ़ा-
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसका दायरा ग्वालियर–चंबल संभाग तक फैल गया। कम से कम आठ बीमा कंपनियों—जिनमें LIC, SBI Life, ICICI Prudential Life Insurance, New India Assurance Company सहित अन्य—के दावे जांच के घेरे में आए। जांच की अवधि जनवरी 2020 से दिसंबर 2024 तक फैली हुई है, जिससे संकेत मिलता है कि यह घोटाला वर्षों तक बिना पकड़े चलता रहा। पहले की जांचों में ग्वालियर, मुरैना और भिंड में कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। बार-बार वही नाम एफआईआर में सामने आना, अधिकारियों के अनुसार, एक पेशेवर और बार-बार अपराध करने वाले नेटवर्क की ओर इशारा करता है। कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कर्मियों, जिनमें एक ग्राम पंचायत सचिव भी शामिल है, के नाम भी मिले हैं।
कानूनी कार्रवाई:
प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318, 319, 336, 338, 340 और 61(2) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश आदि अपराध शामिल हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, बीमा कंपनियों से अभी भी नए दावों का डेटा आ रहा है और हर संदिग्ध भुगतान की सूक्ष्म स्तर पर जांच की जा रही है। जैसे-जैसे वित्तीय लेन-देन की कड़ियां खुलेंगी, और गिरफ्तारियां तथा नए मामले सामने आने की संभावना है।
योजना पर संकट:
सिर्फ ₹436 वार्षिक प्रीमियम वाली प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, जो गरीबों के लिए एक सस्ती सुरक्षा कवच के रूप में बनाई गई थी, अब विश्वास के बड़े दुरुपयोग के एक गंभीर मामले के केंद्र में आ गई है।
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