रोजर्स कैपिटल कंसल्टेंसी के अध्यक्ष और सीईओ चिप रोजर्स ने कहा कि निकट भविष्य में ब्रिक्स देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने या कोई साझा मुद्रा बनाने की संभावना नहीं है।
नई दिल्ली। रोजर्स कैपिटल कंसल्टेंसी के अध्यक्ष और सीईओ चिप रोजर्स ने कहा कि निकट भविष्य में ब्रिक्स देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने या कोई साझा मुद्रा बनाने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर का केंद्रीय स्थान आगे भी बना रहेगा।
डॉलर वैश्विक व्यापार का प्राथमिक आधार
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में चिप रोजर्स ने बताया कि लगभग 99 प्रतिशत स्टेबलकॉइन अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड या अमेरिकी डॉलर द्वारा समर्थित हैं। उनका मानना है कि यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी, क्योंकि डॉलर वैश्विक व्यापार का प्राथमिक आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर द्वारा समर्थित किसी भी मुद्रा या डिजिटल परिसंपत्ति से बाहर व्यापार करने का लक्ष्य रातोंरात पूरा नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी डॉलर का महत्व काफी समय तक बना रहेगा।
ब्रिक्स की साझा मुद्रा को बताया असंभव
ब्रिक्स देशों द्वारा साझा मुद्रा बनाए जाने की संभावना पर रोजर्स ने कहा कि ऐसा कदम असंभव है। उनके मुताबिक, सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को बनाए रखना चाहते हैं और सुगम सीमा पार लेनदेन को सक्षम बनाने वाली तकनीक पर ध्यान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि संप्रभु राष्ट्र अपनी मुद्रा को बनाए रखना चाहते हैं और एक-दूसरे के साथ डिजिटल रूप से बातचीत करने का ऐसा तरीका खोजना चाहते हैं, जिससे अधिक से अधिक बाधाओं को दूर किया जा सके। रोजर्स ने कहा कि उनका मानना है कि नई मुद्रा नहीं होगी। इसके बजाय ऐसी तकनीक विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे घरेलू मुद्राओं में व्यापार करना आसान हो और सीमा पार लेनदेन की बाधाएं कम हों।
ब्रिक्स में बढ़ता व्यापार सकारात्मक विकास
ब्रिक्स के भविष्य पर बात करते हुए रोजर्स ने सदस्य देशों के बीच अधिक व्यापार के लिए समूह के प्रयासों को सकारात्मक विकास बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत व्यापारिक संबंध आर्थिक निर्भरता को गहरा कर सकते हैं और देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। अमेरिकी अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन का हवाला देते हुए रोजर्स ने कहा, “आप आमतौर पर उन देशों के साथ युद्ध नहीं करते जिनके साथ आप व्यापार करते हैं।” उन्होंने कहा कि चाहे ब्रिक्स हो या कोई अन्य व्यापारिक वार्ता, उनके अनुसार इस तरह का सहयोग मानवता और पूरी दुनिया के लिए अच्छा है। जब देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं तो वे एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं और उनके बीच संबंध मजबूत होते हैं। रोजर्स ने कहा कि यह कोई बुरी बात नहीं बल्कि अच्छी बात है। उनके मुताबिक, ब्रिक्स जिन मुद्दों पर चर्चा कर रहा है, वह एक सकारात्मक विकास है।
(एएनआई)
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