ईडी ने ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स के सीएमडी एस वासुदेवन को घर खरीदारों से 927.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया है।
नई दिल्ली (भारत)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) तथा प्रमोटर एस वासुदेवन को 927.22 करोड़ रुपये के कथित गृह खरीदार धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है।
धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार
वासुदेवन को 30 सितंबर को ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ चल रही धन शोधन जांच के सिलसिले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि यह गिरफ्तारी चल रही जांच के बाद हुई है, जिसमें पता चला है कि ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने वासुदेवन के साथ मिलकर गृह खरीदारों से 927.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की और बदले में अपार्टमेंट और यूनिटों का कब्जा नहीं दिया, जिससे बेईमानी से धन को अपने पास रखा और उसका दुरुपयोग किया।
आगे की जांच के लिए 14 दिनों की ईडी हिरासत मंजूर
ईडी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने वासुदेवन को गिरफ्तार किया और बाद में 1 अक्टूबर को बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में पेश किया, जिसने आगे की जांच के लिए 14 दिनों की ईडी हिरासत मंजूर कर ली। ईडी की जांच ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बेंगलुरु शहर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 419, 420 और 120बी के तहत दर्ज कई प्रथम सूचना रिपोर्टों के आधार पर शुरू की गई थी। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा भी कंपनी और उसके प्रमोटर के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी। ईडी ने कहा कि ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुख्य आरोप यह है कि उसने परियोजना के निर्माण को समय पर पूरा करने में चूक की है और ग्राहकों को कब्जा सौंपने में विफल रही है।
2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया
"आरोप है कि कंपनी ने भोले-भाले ग्राहकों को फ्लैट का कब्ज़ा सौंपने तक निर्माण-पूर्व ईएमआई का भुगतान करने का लालच देकर उन्हें फंसाया। हालांकि, कंपनी अपने वादों को पूरा करने में विफल रही और उसने परियोजना और फ्लैटों का निर्माण पूरा नहीं किया। बिल्डर ने न तो खरीदारों को आवासीय इकाइयों का कब्ज़ा दिया और न ही उनकी जमा राशि वापस की, बल्कि पूरी अग्रिम बुकिंग राशि/ऋण राशि का गबन कर लिया," ईडी ने एक बयान में कहा। इससे पहले, ईडी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने पिछले साल 1 अगस्त को इस मामले में पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया था और विभिन्न परिसरों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे।
घर खरीदारों से 927.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी
"आगे की जांच में पता चला है कि ओजोन अर्बाना इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने वासुदेवन (मुख्य प्रमोटर) के साथ मिलकर घर खरीदारों से 927.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की और उक्त राशि के बदले अपार्टमेंट और इकाइयों का कब्ज़ा नहीं दिया, जिससे बेईमानी से धन को अपने पास रखा और उसका दुरुपयोग किया।" जांच और जुटाई गई सामग्री के आधार पर, ईडी ने कहा कि उसने पिछले साल 4 अक्टूबर को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 423.378 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था।
गिरफ्तारी जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री के आधार पर
नई दिल्ली स्थित सीबीआई द्वारा ओजोन इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, ओजोन रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और ओजोन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ घर खरीदारों को धोखा देने के आरोप में दर्ज तीन अलग-अलग एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत एक समानांतर जांच शुरू की गई है। ईडी ने कहा कि वासुदेवन जांच के दायरे में आने वाली तीनों कंपनियों में संयुक्त निदेशक हैं। ईडी के अनुसार, वासुदेवन की गिरफ्तारी जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य अपराध की आय के सृजन, हेरफेर, स्तरीकरण और उपयोग की आगे जांच करना है, जिसमें प्रमोटर और विभिन्न समूह संस्थाओं और उन व्यक्तियों की भूमिका भी शामिल है जिनके माध्यम से धन का प्रवाह किया गया था।
(इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ेंः महाराष्ट्र: छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सीजेपी का विरोध प्रदर्शन