पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने अपने देश की बिगड़ती ईंधन समस्या और भारत की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर को रेखांकित किया है।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने अपने देश की बिगड़ती ईंधन समस्या और भारत की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर को रेखांकित किया है।
भारत की नीतियां बनीं सहारा
उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध के बीच वैश्विक कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए नई दिल्ली अपनी मजबूत नीतिगत उपायों और आपूर्ति रणनीतियों के कारण बेहतर स्थिति में है।
रणनीतिक भंडार और विदेशी मुद्रा का फायदा
एक पाकिस्तानी समाचार चैनल से बात करते हुए मलिक ने कहा कि भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार हैं, जो इस प्रभाव को झेलने में सक्षम हैं।
IMF की शर्तों से जूझ रहा पाकिस्तान
वहीं, पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा लगाई गई कड़ी राहत शर्तों के कारण दबाव में है।
भारत के संसाधनों की तारीफ
मंत्री ने कहा- 'भारत के पास न केवल 600 अरब डॉलर का भंडार है, बल्कि वे रणनीतिक भंडार भी रखते हैं। इससे उन्हें इस संकट से निपटने में मदद मिलती है।' उन्होंने कहा कि भारत ने तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के दौरान करों में कटौती करके खुद को संकट से बचाने की कोशिश की, जिसके लिए उनके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन थे।
पाकिस्तान की मजबूरी: शुल्क बढ़ाना
मंत्री ने बताया कि बजट के दौरान पाकिस्तान ने आईएमएफ और अन्य दाता एजेंसियों के साथ यह तय किया था कि 'हम अपने नुकसान को कम करने के लिए डीजल और पेट्रोल पर शुल्क लगाएंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'अब, डीजल की कीमतें 3-4 गुना बढ़ जाने के कारण, हमने डीजल पर शुल्क घटाकर शून्य करने और पूरा बोझ पेट्रोल पर डालने का फैसला किया है।'
सब्सिडी से राहत देने की कोशिश
साथ ही मोटरसाइकिल चालकों को लक्षित सब्सिडी देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। मंत्री ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने आईएमएफ के साथ किए गए वादे को तोड़ा होता, तो परिणाम और भी बुरे हो सकते थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने आईएमएफ के साथ बातचीत कर शुल्क में 80 रुपये प्रति लीटर तक की कमी करने पर सहमति बनाई।
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