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25 लाख टन गेहूं निर्यात को मंजूरी

केन्द्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं व पांच लाख टन चीनी निर्यात को दी हरी झंडी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में अच्छी पैदावार और पर्याप्त स्टॉक को देखते हुए किसानों को सही दाम दिलाने के लिए 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति प्रदान की है।

केन्द्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं व पांच लाख टन चीनी निर्यात को दी हरी झंडी

India Government |

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में अच्छी पैदावार और पर्याप्त स्टॉक को देखते हुए किसानों को सही दाम दिलाने के लिए 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति प्रदान की है। साथ ही पांच-पांच लाख टन गेहूं उत्पादों और 5 लाख टन चीनी के अतिरिक्त निर्यात की भी अनुमति दी है। यह निर्णय 4 साल बाद गेहूं के निर्यात को फिर से खोलने और घरेलू कीमतों में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। केन्द्र सरकार का उद्देश्य रबी की नई फसल आने से पहले किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कराना और घरेलू बफर स्टॉक का कुशल प्रबंधन कराना है। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने, बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और बफर स्टाक के कुशल प्रबंधन के उद्देश्य से लिया गया है। कोरोना के बाद सरकार ने पहली बार गेहूं निर्यात की अनुमति दी है। साथ ही स्पष्ट किया है कि इस निर्णय से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की जरूरतों पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार का यह निर्णय खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किए बिना घरेलू कीमतों को स्थिर रखने में सहायक होगा। 

गेहूं-चीनी निर्यात कोटा बढ़ा

खाद्य मंत्रालय के अनुसार 2025-26 में निजी कारोबारियों के पास गेहूं का स्टाक 75 लाख टन है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है। इसके अलावा पहली अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध रहने का अनुमान है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि रबी मौसम (2026) में गेहूं का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है। पिछले वर्ष यह 328.04 था। 

गेहूं और गेहूं उत्पादों के साथ ही चीनी निर्यात की भी अनुमति केन्द्र ने विभिन्न मिलों को दी है। चीनी के मोर्चे पर भी सरकार ने चालू 2025-26 चीनी सत्र में पांच लाख टन अतिरिक्त निर्यात की अनुमति दी है। 14 नवंबर 2025 को मिली स्वीकृति के अनुसार 15 लाख टन के अलावा अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसमें 30 जून 2026 तक 70% निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 के आदेश के तहत 15 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी गई थी। हालांकि 31 जनवरी 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का वास्तविक निर्यात हो सका है, जबकि 2.72 लाख टन के निर्यात अनुबंध किए जा चुके हैं। इसके चलते अधिशेष चीनी के प्रबंधन के लिए अतिरिक्त कोटा जारी किया गया है।

चीनी निर्यात कोटा शर्तों सहित

इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी इस शर्त पर उपलब्ध कराई जाएगी कि उन्हें आवंटित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत 30 जून, 2026 तक निर्यात करना होगा। निर्यात कोटा इच्छुक चीनी मिलों के बीच आनुपातिक आधार पर आवंटित किया जाएगा, और मिलें आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति प्रस्तुत करेंगी। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार आवंटित निर्यात कोटा किसी अन्य चीनी मिल के साथ अदला-बदली या विनिमय नहीं किया जाएगा, और यह निर्णय चीनी निर्यात बढ़ाने और देश में अतिरिक्त चीनी की उपलब्धता के प्रबंधन में सहायक होने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) सुधारने और पीक सीजन में 'डिस्ट्रेस सेल' (औने-पौने दाम पर बिक्री) को रोकने के लिए उठाया गया है। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतों को सपोर्ट मिलेगा, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।

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