योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बीते 9 साल में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ी है। इसी के साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान बढ़कर 9.1 प्रतिशत हो गया है।
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बीते 9 साल में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ी है। इसी के साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान बढ़कर 9.1 प्रतिशत हो गया है। इस वृद्धि दर से उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।
2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये हुई प्रदेश की अर्थव्यवस्था
यूपी की अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2016-17 में 13.30 लाख करोड़ रुपये की थी, जो दोगुना से अधिक बढ़कर 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। 2025-26 में यह 36 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगी। यह बात यूपी के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में पेश बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कही। योगी सरकार ने सोमवार से शुरू हुए बजट सत्र में पहली बार विधानसभा में आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट पेश की है।
मजबूत नींव पर खड़ी है उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है। समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और क्षेत्रीय योगदान को विस्तार से सामने रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में विस्तार किया है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित विकास ने राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में यूपी की अर्थव्यवस्था 13.30 लाख करोड़ रुपये की थी, जो दोगुना से अधिक बढ़कर 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। 2025-26 में यह 36 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगी।
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान बढ़कर हुआ 9.1 प्रतिशत
सुरेश खन्ना की रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान भी बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 8.6 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों के मार्फत सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति बताते हुए भविष्य की दिशा भी रेखांकित की। सरकार ने बताया कि विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य पाने के लिए सरकार का विशेष फोकस निवेश, रोजगार और सतत विकास पर होगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा को प्राथमिकता दी जाएगी। युवाओं को कौशल विकास और स्टार्टअप योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
प्रति व्यक्ति आय अनुपात में दर्ज हुआ सुधार
विधान सभा में पेश समीक्षा के अनुसार स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है। वर्ष 2016–17 में ₹54,564 रही प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निवल उत्पाद) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,09,844 हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी प्रति व्यक्ति आय अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2014-15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई थी, जबकि 2024-25 में गिरावट के रुख में बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया।
कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्र में संतुलित विकास
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2024–25 में प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि आधारित न रहकर बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर अग्रसर है।
यूपी का बजट ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में भी विगत 9 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016–17 में ₹3.47 लाख करोड़ का बजट अब बढ़कर वर्ष 2025–26 में ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। समीक्षा में बताया गया कि यह वृद्धि 4.86 लाख करोड़) पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। 2008-09 से 2016-17 (8 वर्ष) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ थी।
पूंजीगत व्यय में हुई दो गुने से अधिक की वृद्धि
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में दो गुने से अधिक वृद्धि की गई है। वर्ष 2016–17 में पूंजीगत व्यय ₹69.79 हजार करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया है। इसका सीधा असर अवसंरचना, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर पड़ा है।
आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति संतुलित और अनुशासित
आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीसडीपी अनुपात वर्ष 2016–17 के 29.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024–25 में 28.0 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से काफी कम है। यह प्रदेश की मजबूत वित्तीय प्रबंधन नीति को दर्शाता है। कर राजस्व में ढाई गुना वृद्धिप्रदेश का अपना कर राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2016–17 में ₹0.86 लाख करोड़ रहा स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू वर्ष 2024–25 में लगभग ढाई गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा में इसे कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।
कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र UP
सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, उत्तर प्रदेश आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड़ से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहा है।
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