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लीगल मेट्रोलॉजी कानून में बड़े सुधार

लीगल मेट्रोलॉजी में बड़ा सुधार: पहली तकनीकी चूक पर सुधार नोटिस, धोखाधड़ी पर सख्ती जारी

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। तकनीकी चूक पर अब जेल नहीं, सुधार नोटिस मिलेगा। जानिये कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर होगा।

लीगल मेट्रोलॉजी में बड़ा सुधार पहली तकनीकी चूक पर सुधार नोटिस धोखाधड़ी पर सख्ती जारी

Additional Secretary in the Department of Consumer Affairs Anupam Mishra |

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन साधते हुए लीगल मेट्रोलॉजी (विधिक मापविज्ञान) ढांचे में दूरगामी नीतिगत बदलाव किए हैं। नए सुधारों के तहत मामूली तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalise) कर दिया गया है। अब पहली बार हुई ऐसी गलतियों पर आपराधिक मुकदमे या सीधे जुर्माने के बजाय 'सुधार नोटिस' (Improvement Notice) जारी किया जाएगा।

तकनीकी चूक पर राहत, लेकिन धोखेबाज़ी पर कसता रहेगा शिकंजा

उपभोक्ता मामले विभाग के अपर सचिव अनुपम मिश्रा ने 'पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' (PHDCCI) के एक कार्यक्रम के दौरान इस बड़े फैसले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नीतिगत सुधार का उद्देश्य नियम-पालन करने वाले कारोबारियों को राहत देना है, जबकि गंभीर उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान बरकरार रहेगा। अनुपम मिश्रा ने कहा, "लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में जो प्रमुख बदलाव हुए हैं, उनमें सबसे मुख्य अपराधमुक्तीकरण (Decriminalisation) है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, "कम वजन देने और मानक बाट व माप में हेरफेर करने से जुड़े प्रावधानों को अलग रखा गया है और उनके खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।"

सुधार नोटिस और लाइसेंसिंग व्यवस्था में राहत

पहले लीगल मेट्रोलॉजी कानून के तहत पहली ही तकनीकी चूक पर आपराधिक मामला दर्ज होता था और जुर्माना लगाया जाता था। नए प्रशासनिक ढांचे में इस कठोर व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है। अपर सचिव अनुपम मिश्रा ने बताया, "लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत कई तकनीकी और मामूली उल्लंघनों के लिए पहली पेनल्टी, जो पहले आपराधिक होती थी और जुर्माना लगाया जाता था, उसकी जगह अब सुधार नोटिस दिया जाएगा।" इसके साथ ही सरकार ने निर्माताओं, डीलरों और मरम्मत करने वालों (Repairers) के लिए पुरानी लाइसेंसिंग व्यवस्था को समाप्त कर उसकी जगह एक पारदर्शी पंजीकरण प्रणाली (Registration System) लागू कर दी है।

राज्यों के नियमों में सामंजस्य और GATC का विस्तार

केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे इस केंद्रीय संशोधन के अनुरूप अपने-अपने प्रवर्तन नियमों (Enforcement Rules) में बदलाव करें। अनुपम मिश्रा के अनुसार, कई राज्यों ने अपने संशोधित नियमों को पहले ही तैयार कर लिया है, जबकि अन्य राज्य इन्हें अधिसूचित करने की प्रक्रिया में हैं। नापतौल और जांच की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सरकार ने 'सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों' (GATCs) का भी विस्तार किया है। अनुपम मिश्रा ने कहा, "अब तक लगभग 50 से 51 GATC को मान्यता दी जा चुकी है। आने वाले समय में नए केंद्र स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।" केंद्र सरकार राज्यों को भी इसी तरह के टेस्टिंग सेंटर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

देश में 'एक समय मानक' के लिए परमाणु घड़ियों (Atomic Clocks) की स्थापना

माप और समय के मानकों को वैश्विक स्तर पर सटीक बनाने के लिए सरकार ने एक और तकनीकी मील का पत्थर हासिल किया है। देश की पांच क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (RRSL) - अहमदाबाद, बेंगलुरु, फरीदाबाद, गुवाहाटी और भुवनेश्वर में परमाणु घड़ियां (Atomic Clocks) स्थापित की गई हैं। अनुपम मिश्रा ने इसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा, "हमने मुख्य रूप से परमाणु घड़ियां लगाई हैं, जिनका उपयोग एक संदर्भ (Reference) के रूप में किया जाएगा। यहीं से अन्य तकनीकी सुविधाएं और केंद्र सटीक समय का संदर्भ ले सकेंगे।" ये परमाणु घड़ियां परमाणुओं की स्थिर आवृत्ति को मापकर अत्यधिक सटीक समय प्रदान करती हैं, जिसका उपयोग मानकीकरण और अंशांकन (Calibration) के लिए किया जाता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था और 'डार्क पैटर्न' पर कसता शिकंजा

डिजिटल स्पेस में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर बात करते हुए अपर सचिव ने बताया कि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने 2023 में ही 13 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) को चिन्हित कर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले छद्म तात्कालिकता (False Urgency) और जबरन सब्सक्रिप्शन जैसे जाल (Subscription Traps) शामिल हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के लिए उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र बनाना अनिवार्य है, जिसके तहत शिकायतों की 48 घंटे के भीतर प्राप्ति रसीद (Acknowledge) देनी होगी। यदि कोई कंपनी तय समय में जवाब नहीं देती है, तो उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) के टोल-फ्री नंबर 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

उद्योग जगत का रुख: 'सख्त नियमन और राहत का संतुलन'

उद्योग संगठन PHDCCI के महासचिव रंजीत मेहता ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहलू को भी रेखांकित किया। रंजीत मेहता ने जोर देकर कहा, "अपराधमुक्त करने (Decriminalisation) का अर्थ यह नहीं माना जाना चाहिए कि नियमन ही खत्म (Deregulation) हो गया है। नियमन बनाए रखना और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।" उन्होंने आगे कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ईमानदार कारोबारियों को छोटी-छोटी गलतियों या प्रक्रियात्मक कमियों के लिए दंडित न किया जाए, बल्कि उन्हें उन कमियों को सुधारने का मौका मिले।"
​(इनपुट: ANI)

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