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ऐतिहासिक गिरावट से डालर के मुकाबले रूपया नब्बे पार

डालर के मुकाबले रूपया नब्बे पार, ऐतिहासिक गिरावट से शेयर मार्केट भी गिरा

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट आई है। रूपया आज अब तक के सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए 90 के स्तर को पार कर गया है।

डालर के मुकाबले रूपया नब्बे पार ऐतिहासिक गिरावट से शेयर मार्केट भी गिरा

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट आई है। रूपया आज अब तक के सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए 90 के स्तर को पार कर गया है। पिछले तीन दिन से गिर रहा रूपया आज बाजार खुलते ही नब्बे पार पहुंच गया। इस दौरान रूपये ने आज 90.29 का स्तर छू लिया। इसका असर शेयर मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है। शेयर मार्केट सुबह से ही लाल निशान में नजर आ रहा है। सेंसेक्स में साढ़े तीन सौ अंक तक की गिरावट देखने को मिल रही है। निफ्टी भी सौ से डेढ़ सौ अंकों के नीचे घूम रहा है। 

ऐतिहासिक गिरावट: रुपया पहली बार 90 के पार, शेयर बाजार भी धड़ाम

डॉलर के मुकाबले आज रुपया 9 पैसे की रिकॉर्ड रिकार्ड गिरावट के साथ हुई। आज यह 90.05 पर ओपन हुआ। कल यह 89.96 रुपये पर क्लोज हुआ था। बाजार खुलते ही रुपये में आई यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार है जब रुपया 90 के पार गया है।

अमेरिकी टैरिफ और गिरते एक्सपोर्ट का असर

रूपये में गिरावट के प्रमुख कारण भारत का बढ़ता हुआ व्यापार और चालू खाता घाटा माना जा रहा। भारत का व्यापार घाटा की चिंता का सबब बना हुआ है। अक्टूबर 2025 में यह रिकॉर्ड 41.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस घाटे के बढ़ने का मुख्य वजह सोने का इंपोर्ट है। यह लगभग तीन गुना बढ़कर 14.7 बिलियन डॉलर हो गया है। साथ ही सोना-चांदी की रिकॉर्ड ऊँची कीमतों ने भी भारत के इंपोर्ट बिल को और बढ़ा दिया है। वहीं, अमेरिका टैरिफ के कारण अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में भी 28% की तेज गिरावट दर्ज की गई है।
रुपये पर बढ़ रहे दबाव के पीछे के अन्य कारणों में डॉलर का स्ट्रांग होना, वैश्विक अनिश्चितताओं में वृद्धि, तेज़ विदेशी डिमांड आदि शामिल है। साथ ही अमेरिका की तुलना में उच्च मुद्रास्फीति, अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें, और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। इस कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है, जिससे विदेशी निवेशक अपना निवेश वापस खींच सकते हैं और विदेशी कर्ज महंगा हो सकता है।

शेयर बाजार से 'एग्जिट' लेते विदेशी निवेशक, डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया पस्त

रूपया कमजोर होने का दूसरा बड़ा कारण फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने दिसंबर के सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में ही 4,335 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं। यह इस साल की शुरुआत से अब तक का कुल आउटफ्लो 1,48,010 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। जब विदेशी निवेशक अपना पैसा देश से बाहर निकालते हैं, तो वह रुपए को डॉलर में बदलकर ले जाते हैं, जिससे रुपये पर बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
एक निजी बैंक के ट्रेडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि 88.80 का स्तर, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक हफ्तों से बचा रहा था, टूटने के बाद बाजार का तकनीकी सहारा खत्म हो गया। इसके चलते रुपया लंबे समय से मौजूद दबावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है, जिनमें कमजोर पूंजी प्रवाह, आयातकों की डॉलर मांग और बढ़ती सट्टेबाजी शामिल हैं।

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