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विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन

जनता की ताकत के आगे तानाशाहों को झुकना ही होगा: दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन की रैली में गरजे धर्मेंद्र यादव

दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन की मेगा रैली में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बयान भी चर्चा में हैं।

जनता की ताकत के आगे तानाशाहों को झुकना ही होगा दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली में गरजे धर्मेंद्र यादव

Samajwadi Party (SP) MP Dharmendra Yadav |

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को 'इंडिया' गठबंधन की मेगा रैली के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर करारा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि देश में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है और तानाशाहों को अंततः जनता की इच्छा के सामने झुकना ही पड़ेगा।

तानाशाहों को झुकना होगा

दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जनता के आगे हर किसी को झुकना पड़ता है। मौजूदा समय में जो सरकारें और जिम्मेदार संस्थान तानाशाही रवैया अपना रहे हैं, उन्हें भी जनता की शक्ति के आगे नतमस्तक होना पड़ेगा। उन्होंने वरिष्ठ सपा नेता आजम खान के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अन्याय और दमन करने वालों को एक दिन इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

डबल इंजन पर तंज

रैली में शामिल होने से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखे बाण चलाए। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा का 'डबल इंजन' का नारा अब 'डबल जीरो' और 'डबल हार' में बदल चुका है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव में हार के बाद सत्ता पक्ष ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर दोबारा गिनती कराई और अब दावा किया जा रहा है कि लाखों वोट एक खास वर्ग के नहीं हैं।

राजभर का पलटवार

दूसरी ओर, अंबेडकर नगर में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर करारा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते और संसद के भीतर सार्थक चर्चा से भागते हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि ये लोग सदन के अंदर मुद्दे उठाने के बजाय संसद सत्र के दौरान अपनी बातों और बहसों को सड़कों पर ले आते हैं, जो संसदीय परंपरा के खिलाफ है।
(इनपुट: ANI)

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