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शिपिंग रुकावट से यूपी के ऑर्डर अटके

शिपिंग कंपनियों ने बुकिंग रोकी, यूपी के निर्यातकों के 5800 करोड़ के ऑर्डर अटके

कानपुर। ईरान - अमेरिका इजराइल के बीच में है जारी युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के निर्यातकों और आयातकों के कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है।

शिपिंग कंपनियों ने बुकिंग रोकी यूपी के निर्यातकों के 5800 करोड़ के ऑर्डर अटके

Processed Food Exports |

कानपुर। ईरान - अमेरिका इजराइल के बीच में है जारी युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के निर्यातकों और आयातकों के कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। विदेशों से कच्चा माल की आपूर्ति बंद होने से राज्य की कई उत्पादन इकाईयों के बंद होने की आशंका बढ़ने लगी है।

मिडिल ईस्ट तनाव से निर्यात कारोबार पर असर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से अब तक शहर के निर्यातकों को 800 करोड़ की चपत लग चुकी है। ये सभी निर्यात ऑर्डर थे जो अटक गए हैं। शिपिंग कंपनियों ने शिपमेंट की दरों में भारी वृद्धि करने के साथ ही बुकिंग भी रोक दी है। एल्युमीनियम, रेअर अर्थ मेटल का आयात रुकने से इंजीनियरिंग और रक्षा उत्पादन पर गहरा असर पड़ गया है। जानकारों का कहना है कि युद्ध एक सप्ताह और खिंचा तो महंगाई का तगड़ा डंक शहरियों को लगेगा। उद्यमी, निर्यातकों के सामने कई संकट सामने आ गए हैं। रक्षा इकाइयों के मुनाफे पर गहरा असर पड़ सकता है।

खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर होता है निर्यात

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि युद्ध का कानपुर से होने वाले निर्यात पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। शहर से खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इस्त्राइल, ईरान, कतर, दुबई, अफ्रीका, यूरोप आदि देशों में उत्पादों का निर्यात किया जाता है। इनमें लेदर और लेदर उत्पाद, जूते, सैडलरी, लेदर जैकेट, सेफ्टी शूज, बैग और बेल्ट, टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स, फ्रेश फूड प्रोडक्ट्स, सब्जियां, मसाले, प्रोसेस्ड फूड, प्लास्टिक टैनिंग केमिकल व अन्य उत्पाद हैं।

नगीना का काष्ठकला उद्योग भी संकट में

इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर बिजनौर जनपद के नगीना के काष्ठकला उद्योग भी पड़ने लगा है। युद्ध होने से करीब दो करोड़ रुपये के ऑर्डर बंदरगाह पर फंसे पड़े हैं जबकि, इतनी ही कीमत के ऑर्डर गोदाम पर रुके हुए हैं। पहले अमेरिका के टैरिफ और अब युद्ध की वजह से नगीना का काष्ठकला उद्योग डगमगाया हुआ है।

हैंडीक्राफ्ट कारोबारियों में बढ़ी चिंता

काष्ठकला उद्यमी पिछले एक साल से अमेरिका टैरिफ की मार झेल रहे हैं। यहां के हैंडीक्राफ्ट कारोबारियों को डर सता रहा है कि यदि इन देशों के बीच जंग लंबी चली तो इसका सीधा असर यहां के निर्यात पर पड़ेगा। इसकी वजह से काष्ठकला उद्यमियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

शिपिंग कंपनियों ने लगाया ‘वार टैक्स’

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों पर इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (आपात संघर्ष अधिभार) यानी वार टैक्स थोप दिया है। ये टैक्स एक कंटेनर पर 3000 डालर (लगभग 2.82 लाख) रुपये है। प्रति कंटेनर मुनाफा ही 2500 से 3000 डालर के आसपास होने के चलते यूपी के निर्यातकों के लिए ये बड़ा झटका है। यह अतिरिक्त शुल्क बहरीन, जिबूती, मित्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन आदि को जाने वाले कंटेनरों पर लागू किया गया है।

समुद्री मार्गों पर बढ़ा सुरक्षा जोखिम

वैश्विक शिपिंग कंपनी सीएमए सीजीएम सहित अन्य कंपनियों ने इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है। कंपनियों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेब स्ट्रेट के आसपास सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण यह शुल्क लगाया गया है।

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