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देश का औद्योगिक उत्पादन 5.2% बढ़ा

देश का औद्योगिक उत्पादन 5.2% की दर से बढ़ा

मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल में तेजी के बावजूद देश में औद्योगिक उत्पादन इस वर्ष फरवरी में 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। जनवरी में यह 4.8 प्रतिशत थी।

देश का औद्योगिक उत्पादन 52 की दर से बढ़ा

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल में तेजी के बावजूद देश में औद्योगिक उत्पादन इस वर्ष फरवरी में 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। जनवरी में यह 4.8 प्रतिशत थी।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अच्छा प्रदर्शन

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उथल-पुथल के बावजूद देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर आधारित भारत की औद्योगिक वृद्धि इस वर्ष फरवरी में बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है, जो जनवरी में 4.8 प्रतिशत थी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी आईआईपी में तीन-चौथाई है और इसमें फरवरी में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापा जाने वाला फैक्ट्री उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा था।

जनवरी के आंकड़ों में संशोधन

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने जनवरी 2026 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के आंकड़े को संशोधित करके 5.1 प्रतिशत कर दिया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 उद्योग समूहों में से 14 ने फरवरी 2026 में फरवरी 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। शीर्ष तीन सकारात्मक योगदानकर्ता हैं बुनियादी धातुओं का निर्माण (जिसमें इस्पात उत्पाद शामिल हैं), मोटर वाहन और मशीनरी एवं उपकरण (जिसमें ट्रैक्टर शामिल हैं)। इन तीनों क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।

खनन और बिजली उत्पादन की स्थिति

एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार खनन उत्पादन में वृद्धि थोड़ी बेहतर होकर 3.1 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले यह 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी। बिजली उत्पादन में वृद्धि फरवरी में 2.3 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से फरवरी के दौरान देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही।

पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता वस्तुओं में वृद्धि

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों से पता चलता है कि कारखानों में उपयोग होने वाली मशीनों सहित पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में इस वर्ष फरवरी में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह सेगमेंट अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार सृजन और आय में वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फरवरी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में भी 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की बढ़ती उपभोक्ता मांग को दर्शाती है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूत बढ़त

सरकार द्वारा राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे परियोजनाओं में किए गए बड़े निवेशों के कारण अवसंरचना और निर्माण सामग्री क्षेत्र में भी इस माह 11.5 प्रतिशत की मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है और समग्र आर्थिक विकास दर में वृद्धि होती है।

आने वाले महीनों को लेकर चिंता

पश्चिम एशिया में हाल के तनाव के कारण आने वाले महीनों में मैन्यूफैक्चरिंग सेगमेंट पर बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने यह संभावना जताते हुए कहा कि उम्मीद है कि मार्च 2026 में आईआईपी वृद्धि दर घटकर तीन से चार प्रतिशत रह जाएगी।

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