मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच हो रहे युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन शक्तियों (Emergency Powers) का इस्तेमाल किया है।
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच हो रहे युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन शक्तियों (Emergency Powers) का इस्तेमाल किया है। केंद्र सरकार ने एलपीजी (LPG) उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। सरकार ने देश की सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू रसोई गैस का उत्पादन अधिकतम करें।
प्रोपेन और ब्यूटेन के उपयोग पर रोक
रिफाइनरियों को सख्त आदेश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन (जो एलपीजी बनाने के मुख्य घटक हैं) का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए न करें। अब इनका इस्तेमाल केवल रसोई गैस बनाने के लिए ही होगा। उत्पादित गैस को केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों — इंडियन ऑयल (IOC), एचपीसीएल (HPCL) और बीपीसीएल (BPCL) को ही सप्लाई किया जाएगा, ताकि घरों तक वितरण सुचारू रहे।
ईरान और इजराइल के बीच युद्ध से उपजा संकट
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% से 65% एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आता है। युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते में बाधा आ सकती है, जहाँ से भारत के गैस टैंकर गुजरते हैं। यदि युद्ध के कारण भविष्य में आयात में कमी आती है, तो घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर देश के 33 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं को किल्लत से बचाया जा सके।
इस बीच, देश की उर्जा सुरक्षा
पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रही उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत के पास कच्चे तेल और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार के अनुसार, भारत के पास पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का इतना स्टॉक है कि किसी भी संभावित आपूर्ति व्यवधान से निपटा जा सके।
आम जनता को न हो दिक्कत
वर्तमान में सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों के रसोई घरों में सिलेंडर की कमी न हो। औद्योगिक उपयोग के बजाय अब घरेलू खपत को प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखना है। आपूर्ति में कमी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार कर रही है स्थिति की निगरानी
ईरान-इजरायल संघर्ष का असर: पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-इजरायल विवाद के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। हालांकि, भारत सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।
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