संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए उसे कठपुतली शासन करार दिया। भारत ने आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के झूठ की पोल खोली। पढ़ें पूरी खबर।
न्यूयॉर्क (अमेरिका)। भारत ने पाकिस्तान को एक "कठपुतली शासन" करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके "झूठ" और "छल" पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के "समय पर हस्तक्षेप" को दिया।
शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, "हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।"
भारत ने पाकिस्तान को बताया सेना का शासन
उन्होंने कहा, "और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।"
गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है।
भारत का पाकिस्तान पर झूठ और छल का आरोप
उन्होंने कहा, "हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।"
शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके "दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व" के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के "समय पर हस्तक्षेप" ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे।
9/11 बरसी पर ओसामा बिन लादेन का जिक्र
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शरीफ ने ये "विचित्र टिप्पणियां" ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, "इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।"
गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, "और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।"
ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देकर दी चेतावनी
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे।
गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की "लंबे समय से बरकरार नीति" की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि "आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।" भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था और पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया था। पहलगाम हमले में 26 नागरिक मारे गए थे।
आतंकवाद पर भारत ने दोहराया आत्मरक्षा का अधिकार
गहलोत ने कहा, "हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।" उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार "ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।"
गहलोत ने कहा, "इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।"
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