संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधियों के भारत दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय ने बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन और संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से साझा किया।
नई दिल्ली (भारत)। भारत के दौरे पर आए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के स्थायी प्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल का विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने रविवार को स्वागत किया। इस दौरान आयोजित वेलकम डिनर में उन्होंने बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन और संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका को लेकर देश का विजन साझा किया। विदेश मंत्रालय ने X पर जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल एक सप्ताह के परिचयात्मक दौरे पर भारत आया है और उन्हें सफल प्रवास के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
अस्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में सक्रिय है भारत
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में सक्रिय है। हाल ही में न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का वैश्विक एजेंडा पेश करते हुए कहा था कि दुनिया को एक ऐसे वैश्विक ढांचे की जरूरत है जो ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो। जयशंकर के मुताबिक, भारत एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता है जहां शांति, सुरक्षा और न्याय को प्राथमिकता मिले, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को बराबरी से सुना जाए और बहुपक्षीय संस्थाएं समय के साथ खुद को बदलते हालात के अनुरूप ढालें।
व्यावहारिक और असरदार समाधान पर जोर
उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ बड़े सिद्धांतों की बात नहीं करता, बल्कि व्यावहारिक और असरदार समाधान पर भी जोर देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति संवाद, सहयोग और भरोसे पर आधारित है। नई दिल्ली का फोकस देशों के बीच मतभेद कम करने, साझेदारी बढ़ाने और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक भूमिका निभाने पर रहेगा। इसके अलावा, भारत भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों को और आधुनिक व तकनीकी रूप से मजबूत बनाने का समर्थन करता है। महिला शांति सैनिकों की भागीदारी बढ़ाना और 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडा को आगे बढ़ाना भी भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन
समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी भारत ने अपना रुख दोहराते हुए कहा कि वह UNCLOS के तहत स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करता है। सुरक्षित समुद्री व्यापार, समुद्री डकैती पर रोक, नाविकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों को भारत अपनी अहम प्राथमिकताओं में शामिल मानता है। (इनपुट: ANI)
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