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आतंकवाद के खिलाफ भारत की दो-टूक

UNSC में भारत का कड़ा संदेश: आतंकियों की लिस्टिंग पर पारदर्शिता, पाकिस्तान को राजनीतिक एजेंडे से बाज आने की चेतावनी

UNSC में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन को घेरा। आतंकवादी संगठनों की लिस्टिंग में पारदर्शिता और सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग। पढ़ें पूरी खबर।

unsc में भारत का कड़ा संदेश आतंकियों की लिस्टिंग पर पारदर्शिता पाकिस्तान को राजनीतिक एजेंडे से बाज आने की चेतावनी

India's Chargé d'Affaires at the UN Mission, Yojna Patel |

न्यूयॉर्क (अमेरिका)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आतंकवादी संगठनों को लिस्ट करने और लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की पुरजोर मांग की है। साथ ही, आतंकवाद से निपटने में पाकिस्तान की भूमिका की परोक्ष आलोचना करते हुए भारत ने इस मंच का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के लिए न करने की चेतावनी दी है।

पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर भारत का निशाना

UNSC में बुधवार को कामकाज के तरीकों पर हुई खुली बहस को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत की चार्ज डी'अफेयर्स योजना पटेल ने कहा, "सुरक्षा परिषद में मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को लिस्ट से हटाने की कोशिश कर उन्हें वैध बनाने या बिना किसी ठोस आधार या दस्तावेज के केवल राजनीतिक कारणों से अन्य संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"

UNSC की आतंक-रोधी समितियों में नेतृत्व संकट

पटेल ने आतंकवाद-रोधी मुख्य सहायक निकायों के नेतृत्व को लेकर जारी गतिरोध पर भी प्रकाश डाला, जो परिषद के भीतर आंतरिक राजनीतिक मतभेदों के कारण बिना नेतृत्व के चल रहे हैं। इस्लामाबाद और बीजिंग ने बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड जैसे संगठनों को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध व्यवस्था के तहत 'आतंकवादी समूहों' के रूप में लिस्ट कराने की कोशिश की है। हालांकि वाशिंगटन, पेरिस और लंदन ने इस कदम को सफलतापूर्वक रोक दिया। साथ ही, पाकिस्तान ने उन आतंकवादियों को लिस्ट से हटवाने की कोशिश की है जिन्हें वह पनाह देता है, जबकि चीन ने पहले जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैबा के नेता साजिद मीर जैसे लोगों को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में बाधा डाली थी।

अध्यक्षों की नियुक्ति में देरी पर भारत सख्त

पटेल ने कहा, "सुरक्षा परिषद की सदस्यता बड़ी जिम्मेदारियां लेकर आती है। यह संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने का मंच नहीं बनना चाहिए।" आतंकवादी संगठनों को नामित करने में लगातार बनी हुई अस्पष्टता का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया, "इस मामले में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए।" भारतीय प्रतिनिधि ने सहायक पैनलों पर पड़ने वाले असर की ओर इशारा किया, जहां मुख्य प्रतिबंध समितियों का नेतृत्व करने की पाकिस्तान की कोशिशों के कारण आम सहमति न बन पाने से नेतृत्व की नियुक्ति में आठ महीने से गतिरोध बना हुआ है।

अध्यक्षों की नियुक्ति में देरी पर भारत और जापान की चिंता

पटेल ने कहा, "ये निकाय हाल के समय में बेहतर ढंग से काम नहीं कर पाए हैं, जिसका मुख्य कारण अध्यक्षों को अंतिम रूप देने में हुई देरी है।" वैश्विक संस्था से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा, "भारत सुरक्षा परिषद से आग्रह करता है कि वह इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान दे और प्राथमिकता के आधार पर अध्यक्षों को अंतिम रूप दे।" साथ ही, उन्होंने नेतृत्व की नियुक्तियों के समाधान के लिए एक "स्पष्ट और अनिवार्य समय-सीमा" तय करने की वकालत की। इसी तरह की चिंता जताते हुए, जापान के उप स्थायी प्रतिनिधि मिकानागी टोमोहिरो ने लीडरशिप में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जाहिर की और अपील की कि बिना और देरी किए, संतुलित, पारदर्शी, कुशल और सभी को साथ लेकर चलने वाली बातचीत के जरिए कोई समझौता किया जाए।

पीसकीपिंग फैसलों में सैनिक भेजने वाले देशों की भागीदारी

संयुक्त राष्ट्र के शांति-रक्षा अभियानों (पीसकीपिंग ऑपरेशन्स) में अहम मुद्दों पर बात करते हुए, पटेल ने काउंसिल के आदेशों (मैंडेट) और सेना व पुलिस भेजने वाले प्रमुख देशों के सामने आने वाली ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच तालमेल की कमी को रेखांकित किया। यह देखते हुए कि सेना भेजने वाले देश "UNSC की सदस्यता से कहीं ज्यादा हैं," उन्होंने कहा कि "सीधे तौर पर जुड़े पक्ष होने के नाते, उन्हें शांति-रक्षा से जुड़े सभी अहम सवालों - जैसे कि मैंडेट और संसाधन पर UNSC के फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।"

80 साल पुराने UNSC ढांचे में सुधार की जरूरत

परिषद की संरचनात्मक कमियों के लिए इसके पुराने ढांचे को जिम्मेदार ठहराते हुए, पटेल ने कहा कि यह संस्था आज भी '80 साल पहले हुए एक संघर्ष के नतीजे' को ही दिखाती है। पाकिस्तान और इटली जैसे समूहों के कारण अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) में प्रक्रियात्मक देरी के बावजूद, सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार पर नई दिल्ली के मजबूत रुख को दोहराते हुए पटेल ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि "यह लक्ष्य केवल स्पष्ट रूप से तय किए गए लक्ष्यों और समय-सीमा के साथ, लिखित वार्ताओं के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।"
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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