भारत की औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार मार्च के महीने में सुस्त पड़कर 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गयी है।
नई दिल्ली। भारत की औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार मार्च के महीने में सुस्त पड़कर 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गयी है। मार्च के महीने में औद्योगिक उत्पादन (IIP) की दर 4.1 फीसदी रिकार्ड की गयी जो फरवरी के संशोधित 5.1 फीसदी से 100 आधार अंक कम है। National Statistical Office (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
NSO द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति बाधित होने का असर अब देश के औद्योगिक उत्पादन पर पड़ने लगा है। इस संकट ने सबसे अधिक विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों को प्रभावित किया है। हालांकि, कोर सेक्टर में 0.4% की गिरावट के बावजूद, समग्र 4.1% की वृद्धि को विश्लेषकों ने संतोषजनक माना है।
फरवरी के मुकाबले गिरावट से चिंता
पिछले वर्ष मार्च, 2025 में औद्योगिक उत्पादन 3.9 फीसदी बढ़ा था। इसे लेकर विश्लेषक कुछ उत्साहित हैं, पर फरवरी के मुकाबले भारी गिरावट को लेकर चिंता भी जाहिर की है। NSO ने फरवरी 2026 के ग्रोथ आंकड़ों में भी थोड़ा बदलाव किया है। पहले इसे 5.2% बताया गया था, जिसे अब 5.1% कर दिया गया है।
सेक्टरवार प्रदर्शन मिला-जुला
NSO के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 4.3% रही, जो पिछले साल इसी महीने में 4% थी। माइनिंग में सुधार हुआ है और यह 1.2% से बढ़कर 5.5% हो गई। हालांकि, बिजली उत्पादन में इस बार सिर्फ 0.8% की ही बढ़त हुई, जबकि पिछले साल यह 7.5% थी।
बिजली क्षेत्र की सुस्ती बनी चिंता
बिजली उत्पादन की धीमी रफ्तार ने कुल औद्योगिक वृद्धि पर दबाव डाला है। फरवरी में जहां इसमें 2.3% की वृद्धि थी, वहीं मार्च में यह घटकर 0.8% रह गई। दूसरी ओर, खनन क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5.5% की वृद्धि दर्ज की।
विनिर्माण में सीमित बढ़त
सूचकांक में सबसे अधिक भार रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में मार्च 2026 में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विनिर्माण के 23 उद्योग समूहों में से 14 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, लेकिन कुल मिलाकर रफ्तार सुस्त बनी रही।
कुछ सेक्टरों में तेज गिरावट
मार्च में परिधान निर्माण का उत्पादन 14.6%, कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स का 8.2%, चमड़े के उत्पादों का 5.0% और अन्य विनिर्माण का 29.8% गिर गया, जो चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों ने जताई आगे की चिंता
CRISIL की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के अनुसार मार्च के आंकड़े अनिश्चितता के केवल एक हिस्से को ही दर्शाते हैं और कमजोर उत्पादक भावना अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। उन्होंने आशंका जताई कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है
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