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ग्रेट निकोबार परियोजना पर जयराम रमेश का हमला

'ग्रेट निकोबार में प्रधानमंत्री मोदी पर्यावरणीय आपदा की ओर लगातार अग्रसर हो रहे हैं': जयराम रमेश

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे पर्यावरणीय आपदा की ओर बढ़ता कदम बताया है।

ग्रेट निकोबार में प्रधानमंत्री मोदी पर्यावरणीय आपदा की ओर लगातार अग्रसर हो रहे हैं जयराम रमेश

Jairam Ramesh Slams Great Nicobar Project |

नई दिल्ली,(भारत)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित मेगा विकास परियोजना को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना द्वीप की समृद्ध जैव विविधता और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।

सोशल मीडिया पर किया दस्तावेज साझा

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत दस्तावेज साझा किया, जिसमें इस परियोजना को लेकर उनके पिछले कुछ वर्षों के प्रयासों का उल्लेख है। इसमें उनके सार्वजनिक वक्तव्य, संसद में उठाए गए मुद्दे तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रियों को भेजे गए पत्र और उन पर प्राप्त जवाब शामिल हैं।

ग्रेट निकोबार पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र

उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों से प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उनके अनुसार, इस विषय पर आगे भी जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा सके।

इस परियोजना के खिलाफ कई कानूनी याचिकाएँ दायर

कांग्रेस नेता ने यह भी बताया, कि इस परियोजना के खिलाफ विभिन्न नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से कई कानूनी याचिकाएँ दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े नियमों, वन अधिकार अधिनियम, तटीय क्षेत्र विनियमन (सीआरजेड) अधिसूचना तथा अन्य पर्यावरणीय प्रावधानों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया है। साथ ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के एक आदेश को भी न्यायालय में चुनौती दी गई है।

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की सामरिक और आर्थिक आवश्यकताओं के लिए आवश्यक

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है, कि ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की सामरिक और आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। सरकार के अनुसार, यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग के निकट स्थित द्वीप की रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाएगी, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता कम करेगी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती देगी।

पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस लगातार जारी

परियोजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गैस और सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र तथा आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है। हालांकि, इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस लगातार जारी है और यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में भी बना हुआ है। (एएनआई)

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