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भारत-जापान रक्षा साझेदारी

चीन से घिरा है भारत, रक्षा सहयोग और बढ़ाएं दोनों देश: जापानी पूर्व उप-रक्षा मंत्री हिदेशी तोकुची

जापान के पूर्व उप-रक्षा मंत्री हिदेशी तोकुची ने चेतावनी दी है कि भारत कई तरफ से चीन से घिरा है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक में भारत-जापान सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

चीन से घिरा है भारत रक्षा सहयोग और बढ़ाएं दोनों देश जापानी पूर्व उप-रक्षा मंत्री हिदेशी तोकुची

Hideshi Tokuchi, Japan's former Vice-Minister of Defence for International Affairs |

नई दिल्ली। जापान के पूर्व उप-रक्षा मंत्री (अंतर्राष्ट्रीय मामले) हिदेशी तोकुची ने चेतावनी दी है कि भारत चारों तरफ से चीन की सामरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर में चीन की जमीनी सेना, पाकिस्तान को मिल रहे चीनी हथियार और हिंद महासागर में बीजिंग की बढ़ती मौजूदगी ने भारत के लिए बड़ा सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।

तोकुची ने नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 'इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग' (IPRD) 2026 के इतर ANI को दिए एक विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक दबाव से निपटने के लिए भारत और जापान को अपनी रक्षा साझेदारी को नए स्तर पर ले जाना होगा।

चीन की घेराबंदी और भारत के सामने सुरक्षा चुनौतियां

जापानी रक्षा विशेषज्ञ ने भारत के सुरक्षा परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि चीन की नीतियां भारत को हर तरफ से सीमित करने की हैं। उनके मुताबिक, हिंद महासागर में चीन का समुद्री विस्तार सीधे तौर पर क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और जापान दोनों ही प्रमुख समुद्री राष्ट्र हैं और एक ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग साझा करते हैं। ऐसे में दोनों देशों के सामने सुरक्षा चुनौतियां भी एक जैसी ही हैं।

रक्षा समझौते और समुद्री सुरक्षा पर रणनीतिक फोकस

दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को गहरा करने के रास्तों पर चर्चा करते हुए तोकुची ने जापानी रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइज़ुमी की हालिया भारत यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने अगस्त में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और बेहतर तालमेल के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है।

तकनीक और जहाजों की मरम्मत में साझेदारी की आवश्यकता

तोकुची ने कहा कि सिर्फ युद्धाभ्यास तक सीमित रहने के बजाय अब ठोस रक्षा सहयोग पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रक्षा तकनीक, सैन्य उपकरणों में सहयोग और युद्धपोतों की मरम्मत ऐसे विषय हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना होगा।

उन्होंने जोर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी और चीनी महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग की अनिवार्यता को और बढ़ा दिया है।

जापान पर भी बढ़ रहा है पीएलए नौसेना का दबाव

चीन के आक्रामक रुख का जिक्र करते हुए पूर्व उप-रक्षा मंत्री ने कहा कि जापान खुद भी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नौसेना और चीनी तटरक्षक बल के भारी दबाव का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश एक ही तरह के खतरे को महसूस कर रहे हैं, इसलिए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली और टोक्यो बहुत कुछ मिलकर कर सकते हैं।

IPRD 2026 का आयोजन और भावी रणनीति

तोकुची की यह महत्वपूर्ण टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत की राजधानी नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग के 2026 संस्करण का आयोजन हो रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय 'हिंद-प्रशांत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग' रखा गया है।

तीन दिवसीय इस उच्चस्तरीय संवाद का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की मजबूत नींव तैयार करने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञों के विचारों को एक मंच पर लाना है।
(इनपुट: ANI)

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