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कोल्हापुरी चप्पल को मिली वैश्विक स्तर पर नयी पहचान

'कोल्हापुरी चप्पल' को मिली वैश्विक स्तर पर नयी पहचान, इटली की कंपनी 'प्राडा' ने विवाद के बाद किया भारत में करार

भारत का कोल्हापुरी चप्पल अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ग्लोबल ब्रांड बनने की तरफ अग्रसर है।

कोल्हापुरी चप्पल को मिली वैश्विक स्तर पर नयी पहचान इटली की कंपनी प्राडा ने विवाद के बाद किया भारत में करार

Kolhapuri chappal gets a new identity globally |

नई दिल्ली। भारत का कोल्हापुरी चप्पल अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ग्लोबल ब्रांड बनने की तरफ अग्रसर है। इटली की मशहूर फैशन कंपनी "प्राडा" ने भारत की दो सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बनाने के लिए एक समझौता (एमओयू) किया है।

इटली - भारत व्यापार सम्मेलन के अवसर पर हुआ यह समझौता

यह समझौता इटली - भारत व्यापार सम्मेलन के अवसर पर इटालियन वाणिज्य दूतावास मुंबई में इटली के कॉन्सुलेट जनरल (वाणिज्य दूत) की मौजूदगी में हुआ। संत रोहिदास लेदर इंडस्ट्रीज, लेदर वर्कर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और डॉ. बाबू जगजीवन राम लेदर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने MoU (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें लिडकॉम और लिडकार नाम की दो सरकारी कंपनियां शामिल हैं।

"प्राडा" की कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल को फरवरी 2026 में दुनिया के 40 चुनिंदा "प्राडा" स्टोर्स और उसके ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया जाएगा। इस करार से कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात अब हर साल 1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात की जानकारी दी।

प्राडा से समझौता होने पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जताई खुशी

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने "प्राडा" के साथ करार के बाद कहा कि जब उन्होंने सुना कि "प्राडा" और भारत के कोल्हापुरी चप्पल बनाने वाले कारीगर एक साथ काम करने जा रहे हैं तो उन्हें बड़ी खुशी हुई। उन्होंने कहा कि वह अकसर सोचते थे कि कोल्हापुरी चप्पलें अपने सुंदर डिजाइन, हाथ से बनने वाली कला, चमकीले रंग और पहनने में आरामदायक होने के बावजूद एक बड़ा वैश्विक ब्रांड क्यों नहीं बन पातीं।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि उन्हें खुशी है कि "प्राडा" ने इस कला को पहचाना और अब दुनिया भर में लोग कोल्हापुरी चप्पलों को एक नए रूप में देख पाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि भारत से कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात 1 अरब डॉलर तक पहुंचे और अब यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 

ईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए प्रतिबद्ध है भारत

इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी से मिलने के बाद पीयूष गोयल ने कहा कि यह लक्ष्य इसलिए भी संभव है क्योंकि जो लोग एक बार कोल्हापुरी चप्पल पहन लेते हैं, वह फिर कोई और चप्पल पहनना ही नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि भारत यूरोपियन यूनियन (ईयू) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह इटली के साथ तकनीक, रक्षा, कपड़ा, कृषि और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में और मजबूत साझेदारी बनाना चाहता है।

मिलान फैशन वीक में प्राडा ने लॉन्च किया था कोल्हापुरी जैसी हूबहू चप्पल

"प्राडा" और कोल्हापुरी चप्पल के लिए करार के पीछे एक विवाद भी रहा है। "प्राडा" ने मिलान फैशन वीक (2025) में 'टो-रिंग सैंडल्स' नामक एक फुटवियर लॉन्च किया था, जो दिखने में हूबहू कोल्हापुरी चप्पल जैसी थी। लेकिन उस पर कोई भारतीय मूल का उल्लेख नहीं था और कीमत बहुत ज़्यादा थी। इस शो के बाद भारतीय दर्शक भड़क गये थे। 

शिकायत के बाद प्राडा ने स्वीकारी भारतीय डिजाइन से प्रेरित होने की बात

भारतीय कारीगरों ने "प्राडा" पर सांस्कृतिक विनियोग और बौद्धिक संपदा अधिकारों (GI Tag) के उल्लंघन का आरोप लगाया। इस शिकायत के बाद "प्राडा " ने भारतीय डिजाइन से प्रेरित होने की बात स्वीकार की और अब दोनों मिलकर 2026 में प्रामाणिक कोल्हापुरी चप्पलों का उत्पादन और बिक्री करने जा रहे हैं, जो भारत की विरासत को वैश्विक पहचान देगा। मालूम हो कि कोल्हापुरी चप्पल को 2019 में जीआई टैग मिला था, जो महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ जिलों के कारीगरों को इसके नाम और डिजाइन की रक्षा का अधिकार देता है।

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