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ग्रामीण बेरोजगारी दर बढ़ी

अप्रैल-जून में श्रम बल की भागीदारी घटकर 54.6% , ग्रामीण बेरोजगारी बढ़कर 4.8% हुई

श्रम बल सर्वेक्षण त्रैमासिक बुलेटिन में बताया कि श्रमिक जनसंख्या अनुपात, जो नियोजित जनसंख्या के अनुपात को दर्शाता है, जनवरी-मार्च 2026 के दौरान 52.8 प्रतिशत से घटकर 51.7 प्रतिशत हो गया।

अप्रैल-जून में श्रम बल की भागीदारी घटकर 546  ग्रामीण बेरोजगारी बढ़कर 48  हुई

नई दिल्ली । सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की समग्र श्रम बल सहभागिता दर पिछली तिमाही के 55.5 प्रतिशत से घटकर 54.6 प्रतिशत हो गई।

ग्रामीण बेरोजगारी दर बढ़ी

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपने नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण त्रैमासिक बुलेटिन में बताया कि श्रमिक जनसंख्या अनुपात, जो नियोजित जनसंख्या के अनुपात को दर्शाता है, जनवरी-मार्च 2026 के दौरान 52.8 प्रतिशत से घटकर 51.7 प्रतिशत हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में यह गिरावट अधिक स्पष्ट थी, जहां श्रम बल सहभागिता पिछली तिमाही के 58.2 प्रतिशत से घटकर 56.9 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में ग्रामीण बेरोजगारी 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। हालांकि, अप्रैल-जून 2025 में दर्ज 4.8 प्रतिशत के मुकाबले ग्रामीण बेरोजगारी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। समग्र श्रम बल सहभागिता दर पिछले वर्ष के मुकाबले 0.4 प्रतिशत अंक कम रही।

महिलाओं की भागीदारी कम हुई

इस तिमाही में महिलाओं की भागीदारी कमजोर हुई, जिससे कुल महिला श्रम बल भागीदारी दर 34.7 प्रतिशत से घटकर 33.2 प्रतिशत हो गई। महिला श्रमिक जनसंख्या अनुपात भी 32.8 प्रतिशत से घटकर 31.3 प्रतिशत हो गया। शहरी श्रम बाजार के संकेतक अपेक्षाकृत स्थिर रहे। शहरी श्रम बल भागीदारी 50.2 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही, जबकि शहरी श्रमिक जनसंख्या अनुपात पिछली तिमाही के 46.9 प्रतिशत की तुलना में 46.8 प्रतिशत रहा।
शहरी बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च में 6.6 प्रतिशत के मुकाबले 6.7 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रही। शहरी महिला बेरोजगारी 9.1 प्रतिशत से घटकर 8.7 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी पुरुषों की श्रम बल भागीदारी मामूली रूप से बढ़कर 75 प्रतिशत से 75.3 प्रतिशत हो गई।

नियमित वेतनभोगी रोजगार में वृद्धि 15.5 प्रतिशत से बढ़कर 16.1 प्रतिशत हुई

सर्वेक्षण में नियमित वेतनभोगी रोजगार में वृद्धि देखी गई। ग्रामीण रोजगार में इसकी हिस्सेदारी 15.5 प्रतिशत से बढ़कर 16.1 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी हिस्सेदारी 48.9 प्रतिशत से बढ़कर 49.3 प्रतिशत हो गई। इस तिमाही के दौरान ग्रामीण रोजगार में कृषि से हटकर अन्य क्षेत्रों की ओर भी बदलाव आया। कृषि का हिस्सा 55.8 प्रतिशत से घटकर 52.9 प्रतिशत हो गया, जबकि खनन और उत्खनन सहित द्वितीयक क्षेत्र का हिस्सा 22.6 प्रतिशत से बढ़कर 24.4 प्रतिशत हो गया। तृतीयक क्षेत्र का हिस्सा 21.7 प्रतिशत से बढ़कर 22.7 प्रतिशत हो गया। सरकार का अनुमान है कि इस तिमाही के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के औसतन 56.6 करोड़ लोग कार्यरत थे, जिनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 16.4 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
ये तिमाही अनुमान ग्रामीण और शहरी भारत के 5,59,673 लोगों से एकत्रित जानकारी पर आधारित हैं। (एएनआई)

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