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मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन का दांव चला

मायावती ने शुरू की दलित - मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद

बसपा प्रमुख मायावती यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलित - मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद तेज कर दी है।

मायावती ने शुरू की दलित - मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद

मायावती ने शुरू की दलित - मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद

मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन का दांव चला

लखनऊ। 
बसपा प्रमुख मायावती यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलित - मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की सत्ता में हाशिये पर पहुंच चुकींं मायावती ने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश के तहत मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन का दांव चला है। मालूम हो कि मायावती अपनी सोशल इंजीनियरिंग के अंतर्गत पूर्व में दलित - ब्राह्मण मुस्लिम गठजोड़ बनाकर सत्ता का स्वाद चख चुकी हैं। 

मायावती ने बुधवार को पहली बार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आये मुस्लिम नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय में डेढ़ घंटे तक बैठक की। इसमें यूपी के 75 जिलों के जिलाध्यक्ष समेत पार्टी के करीब 450 शीर्ष नेता शामिल हुए। इस दौरान भतीजे आकाश आनंद ने मंच पर मायावती के पैर छूए। आकाश आनंद की मंच पर मौजूदगी से कार्यकर्ताओं को संदेश देने का प्रयास किया गया कि पार्टी का भावी नेतृत्व अब जल्द ही युवा नेता के हाथों में होगा। सांसद चन्द्रशेखर रावण के बढ़ते प्रभाव के बीच मायावती ने मुस्लिम समाज में आकाश आनंद को प्रोजेक्ट करने की कोशिश भी बैठक में की।

मायावती की बैठक की खास बात यह रही कि लखनऊ में बसपा कार्यालय के जिस हॉल में मीटिंग हुई, उसमें बसपा के सीनियर नेता पीछे की लाइन में बैठे थे, जबकि मुस्लिम नेता पहली लाइन में बैठे। ऐसा कर मायावती ने दलित - मुस्लिम एकता को प्राथमिकता देने का साफ संदेश देने का प्रयास किया है। 

मीटिंग के बाद मायावती ने सभी नेताओं को पीले रंग की फाइल दी गई, जिसमें बसपा की पुरानी सरकारों के मुस्लिम समाज के लिए किए गए 100 कामों की लिस्ट है। लिस्ट देकर बसपा सुप्रीमो ने कहा - इन कामों के साथ मुस्लिम समाज के बीच जाइए। उनसे बताइए कि सपा-कांग्रेस जैसी पार्टियां सिर्फ बातें करती हैं। बसपा ने ही उनके विकास के लिए काम किया। मुस्लिम समाज को सीधे तौर पर सपा और कांग्रेस की बजाय बसपा का समर्थन करना चाहिए, ताकि भाजपा को हराया जा सके। बैठक में सपा-कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में दरार डालने की कोशिश के तहत मुस्लिम समाज को स्पष्ट संदेश दिया गया कि “सपा-कांग्रेस सिर्फ बातें करती हैं, बसपा ने काम किया। मुस्लिम वोट बसपा को मिलना चाहिए, जिससे कि भाजपा को हराया जा सके।”

मालूम हो कि AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और चन्द्र शेखर रावण के साथ ही सपा द्वारा दलित-पिछड़ा-मुस्लिम गठजोड़ को लेकर शुरू किये PDA फॉर्मूला से निपटना एक बड़ी चुनौती है। 

याद रहे कि वर्ष 2012 में मुस्लिम और दलित ब्राह्मण वोटों की सोशल इंजीनियरिंग के सहारे मायावती ने 80 सीटें जीती थीं। लेकिन 2022 में मुस्लिम वोट बंटने और ब्राह्मण के छिटकने के कारण बसपा सिर्फ एक सीट पर सिमट गयी थी। ये एकमात्र सीट भी बसपा के कारण नहीं उसके ठेकेदार विधायक उमाशंकर सिंह के कारण मिली थी। 
बसपा के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर 15-18 फीसदी मुस्लिम वोट बसपा को मिला, तो पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल में उसे 30-40 सीटें मिलना संभव है। अब देखना होगा कि यह गठजोड़ 2027 में बसपा को किंगमेकर बना सकता है या नहीं ?

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