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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार का MEA ने दिया करारा जवाब, PoJK हिंसा पर भी साधा निशाना

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार का MEA ने वायरल मीम से करारा जवाब दिया। PoJK हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और पाकिस्तान के दावों पर भारत का सख्त रुख।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार का mea ने दिया करारा जवाब pojk हिंसा पर भी साधा निशाना

MEA Hits Back at Pakistan's Kashmir Propaganda |

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर फैलाए जा रहे झूठे और भ्रामक दुष्प्रचार (Misinformation) पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद अनूठे और करारे अंदाज में जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के 'MEA फैक्ट चेक' हैंडल ने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय अमेरिकी शो 'साउथ पार्क' (South Park) के एक वायरल मीम का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के नापाक प्रोपेगैंडा की हवा निकाल दी है। इस मीम के जरिए भारत ने एक बार फिर दो टूक स्पष्ट किया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा।

पाकिस्तान के झूठे दावों की पोल

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक हैंडल से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर तमाम भ्रामक दावे किए गए थे, जिसमें क्षेत्र को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत विवादित बताने और भारत के 2019 के फैसलों पर सवाल उठाने जैसी बातें शामिल थीं। इन दावों का कड़ा संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों सहित संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। MEA ने अपने आधिकारिक पोस्ट में कहा, "पाकिस्तान द्वारा वर्तमान में चलाई जा रही दिखावटी चुनावी कवायद केवल उसके अवैध कब्जे को छिपाने और क्षेत्र में किए जा रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का एक ढोंग मात्र है।"

PoJK में सुलग रही असंतोष की आग

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में भड़के जन-आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के लोगों का यह गुस्सा इस्लामाबाद की दशकों पुरानी व्यवस्थागत आर्थिक लूट, बुनियादी अधिकारों के हनन और प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम है।

बता दें कि रावलकोट और मुजफ्फराबाद के बीच उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और प्रशासन के बीच बातचीत विफल हो गई। JAAC ने 27 जुलाई दोपहर 1 बजे तक अपनी मांगें माने जाने का अल्टीमेटम दिया था। मांगें पूरी न होने पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करना शुरू कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक इस क्रूर कार्रवाई में कम से कम 14 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए।

करीब 14 लोगों की हुई मौत, दर्जनों हुए हैं घायल

यह विरोध प्रदर्शन 52 दिनों से चल रहे लंबे आंदोलन के दौरान तब और भड़क गया जब क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। रावलकोट के बाद अशांति मीरपुर तक फैल गई, जहां सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुरक्षा बलों ने ताजा प्रदर्शनों के दौरान भी नागरिकों पर गोलियां चलाईं। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों के हवाले से सामने आया कि सोमवार शाम हुई इस क्रूरता (brutality) में कम से कम 14 लोग मारे गए और करीब दो दर्जन लोग घायल हो गए। वहीं, JAAC का दावा है कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच हुई हिंसा में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 67 हो गई है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर घातक बल के प्रयोग की रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों पर किए जाने वाले अत्याचारों पर रोक लग सके।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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