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अरुणाचल पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया रुख

अरुणाचल में PLA के साथ कथित टकराव पर विदेश मंत्रालय का बयान, कहा- सीमावर्ती इलाकों में शांति जरूरी

अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ कथित टकराव को लेकर MEA ने सीमा पर शांति बनाए रखने की जरूरत बताई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र से मामले पर जवाब मांगा।

अरुणाचल में pla के साथ कथित टकराव पर विदेश मंत्रालय का बयान कहा- सीमावर्ती इलाकों में शांति जरूरी

Peace Along Border Areas Is Essential |

नई दिल्ली (भारत)। अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना (PLA) के साथ कथित तौर पर लगातार आमना-सामना होने की खबरों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को सरकार का रुख स्पष्ट किया। यह बयान ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के कथित बयानों के बाद आया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-चीन संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।

सीमा पर तनाव को लेकर MEA ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने अपनी ब्रीफिंग में कहा कि भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में समय-समय पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सेना तय गश्त के तरीकों से हट जाती है। मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

MEA ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कुछ क्षेत्रों में LAC को लेकर आपसी समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। विशिष्ट घटनाक्रम से जुड़े सवालों पर मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने टकराव की खबरों पर जताई चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ कथित आमना-सामना होने की खबरों को चिंताजनक बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या कोई और गंभीर टकराव हो रहा है। खड़गे ने अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों का भी उल्लेख किया।

खड़गे के मुताबिक, वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी कथित टकराव जारी रहने की खबरें चिंता बढ़ाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है। साथ ही, उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

भारत-चीन वार्ता के नतीजों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत और चीन के बीच हुई बैठकों तथा राजनयिक वार्ताओं का उल्लेख करते हुए उनके ठोस नतीजों पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई कम से कम 23 बैठकों और बातचीत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25 दौर और WMCC की 36 बैठकों का जिक्र किया। उन्होंने SCO और BRICS शिखर सम्मेलनों का भी उल्लेख किया।

खड़गे ने पूछा कि क्या भारत के मई 2020 से पहले के गश्त संबंधी अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों पर भरोसा जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही को जरूरी बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री से विपक्ष पर हमला करने के बजाय संसद और देश को स्थिति की जानकारी देने की मांग की।

प्रधानमंत्री से संसद में बयान देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने सीमा पर कथित टकराव के मुद्दे पर राजनयिक जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है और प्रधानमंत्री को संसद में इस विषय पर बयान देना चाहिए।

खड़गे ने भारत-चीन संबंधों से जुड़ी बैठकों और वार्ताओं का हवाला देते हुए उनके परिणामों पर स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि सीमा पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और दोनों देशों के संबंधों के विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। (Source: ANI)

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