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केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को बुलाई सर्वदलीय बैठक

संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने 19 जुलाई को बुलाई सर्वदलीय बैठक, जानिए क्या है पूरा एजेंडा

संसद के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, सरकार ने 19 जुलाई को सुबह 11 बजे एक बेहद महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने 19 जुलाई को बुलाई सर्वदलीय बैठक जानिए क्या है पूरा एजेंडा

Indian Parliament Building |

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, सरकार ने 19 जुलाई को सुबह 11 बजे एक बेहद महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार जहां एक तरफ अपने विधायी एजेंडे को सामने रखेगी, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी उन मुद्दों की फेहरिस्त पेश करेगा जिन पर वह सदन में सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हर संसद सत्र से पहले आयोजित होने वाली यह पारंपरिक सर्वदलीय बैठक इस बार बेहद गहमागहमी भरी होने की उम्मीद है। सरकार के पास इस सत्र के लिए एक भारी-भरकम विधायी एजेंडा तैयार है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा।

बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच हंगामेदार होगा मानसून सत्र

यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी उथल-पुथल भरा रहने के आसार हैं, क्योंकि हाल के हफ्तों में कई प्रमुख विपक्षी दलों के भीतर बड़ी टूट और आंतरिक दरारें देखने को मिली हैं। इन बदलते समीकरणों का सीधा असर संसद के भीतर दोनों सदनों की कार्यवाही और शक्ति संतुलन पर पड़ना तय माना जा रहा है।

इस राजनीतिक फेरबदल की सबसे बड़ी मार तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर पड़ी है, जो विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ही आंतरिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए "नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया" (NCPI) में अपना विलय कर लिया है और लोकसभा में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। इसके अलावा, टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुके हैं।

शिवसेना (UBT) और AAP को भी लगा बड़ा झटका

राजनीतिक दलबदल का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को भी एक और तगड़ा झटका लगा है। लोकसभा में पार्टी के छह सांसदों ने पाला बदलते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को भी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके सात राज्यसभा सांसद पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

इस भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच विपक्ष भी पीछे हटने के मूड में नहीं है। विपक्षी दल इस सत्र के दौरान देश के बहुचर्चित NEET-UG पेपर लीक मामले को जोर-शोर से उठाने की रणनीति बना रहे हैं। इसके साथ ही, 'ऑपरेशन सिंदूर' में हुए नुकसान और हताहतों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए बयानों पर भी विपक्ष आक्रामक रुख अख्तियार करेगा। कांग्रेस ने तो इस मामले में रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दे दिया है।

20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा विधायी कामकाज

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से इस आधिकारिक निर्णय की जानकारी साझा की थी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की स्वीकृति दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होगा और 13 अगस्त, 2026 तक जारी रहेगा, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जा सकें।"

130वें संविधान संशोधन विधेयक पर टिकीं सबकी नजरें

इस पूरे मानसून सत्र के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला मुद्दा 130वां संविधान संशोधन विधेयक रहने वाला है। इस प्रस्तावित विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) द्वारा आगामी 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अपनाए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

इस विधेयक ने देश के भीतर एक बहुत बड़ी राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। दरअसल, इस बिल में एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किया गया है, जिसके तहत यदि देश के प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या कोई भी केंद्रीय व राज्य मंत्री गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्वतः ही (आटोमेटिक) उनके पद से हटा दिया जाएगा।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

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