कक्षा-9 की नई सोशल साइंस की किताब में 'प्रस्तावना' पर अलग से कोई चैप्टर न होने और 'सेक्युलर'व 'सोशलिस्ट' शब्दों का साफ़ ज़िक्र न होने की खबरों को NCERT के सूत्रों ने भ्रामक बताया है।
नई दिल्ली। कक्षा-9 की नई सोशल साइंस की किताब में 'प्रस्तावना' (Preamble) पर अलग से कोई चैप्टर न होने और 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) व 'सोशलिस्ट' (समाजवादी) शब्दों का साफ़ ज़िक्र न होने को लेकर चल रहे विवाद के बीच, NCERT के सूत्रों ने कहा है कि इन्हें हटाए जाने की खबरें भ्रामक हैं। उनका तर्क है कि बदले हुए सिलेबस के तहत इन कॉन्सेप्ट्स को अलग-अलग क्लास में बांट दिया गया है।
नई किताब के कंटेंट को लेकर उठे सवाल
कुछ रिपोर्टों में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि क्लास 9 की सोशल साइंस की नई किताब में 'आपातकाल' (Emergency) पर एक सेक्शन तो है, लेकिन इसमें 'प्रस्तावना' (Preamble) पर कोई अलग चैप्टर नहीं है। साथ ही, इसमें 'धर्मनिरपेक्ष' (secular) और 'समाजवादी' (socialist) जैसे शब्दों को साफ़ तौर पर नहीं समझाया गया है, जो पिछले संस्करण का हिस्सा थे।

(कक्षा 9 की 'गंगा' किताब में प्रस्तावना)
बदले सिलेबस में अलग-अलग कक्षाओं में बांटे गए विषय
NCERT के सूत्रों ने ANI को बताया कि ऐसी खबरें गुमराह करने वाली हैं जिनमें दावा किया गया है कि कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई किताब से प्रस्तावना (Preamble) को हटा दिया गया है। नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत सिलेबस को फिर से तैयार किया गया है, इसलिए टॉपिक्स को एक ही किताब में शामिल करने के बजाय अलग-अलग क्लास में बांटा गया है।

(तस्वीर 7वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब से)
प्रस्तावना अब कक्षा 10 के विस्तृत पाठ्यक्रम का हिस्सा
NCERT के सूत्रों के अनुसार, सभी क्लास की नई NCERT किताबों- जिनमें सोशल साइंस की सभी किताबें भी शामिल हैं-के शुरुआती पन्नों में प्रस्तावना (Preamble) दी गई है। अलग-अलग क्लास में विषयों के बंटवारे के कारण, अब संविधान की प्रस्तावना पर एक विस्तृत विषय 10वीं क्लास के सिलेबस का हिस्सा है।

(कक्षा 7 की सोशल साइंस की किताब)
कक्षा 6 से 8 के सिलेबस में शामिल हैं संवैधानिक मूल्य
NCERT के स्रोतों से यह भी पता चलता है कि धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता और समाजवाद जैसे संवैधानिक मूल्यों को कक्षा 6 से 8 में, खासकर कक्षा 7 की सोशल साइंस की किताब में शामिल किया गया है और कक्षा 10 में इनके बारे में और विस्तार से बताया जाएगा। NCERT सूत्रों का कहना है कि ये नई किताबें सोशल साइंस के अलग-अलग विषयों को पढ़ाने में एक इंटीग्रेटेड अप्रोच (एकीकृत तरीका) अपनाती हैं। इसलिए, पिछली किताबों से इनकी एक-एक चीज़ की तुलना करना सही नहीं है, क्योंकि दोनों के पढ़ाने के तरीके और कंटेंट में काफी अंतर होगा। (Source: ANI)
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