कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उत्तराखंड के 1,320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़े गोपनीय दस्तावेज लीक होने का दावा किया है।
नई दिल्ली (भारत)। उत्तराखंड सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि कांग्रेस ने पावर प्रोजेक्ट के दस्तावेजों के लीक होने का दावा करते हुए राज्य प्रशासन के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नई दिल्ली में मीडिया से रूबरू होते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूजेवीएनएल (UJVNL) और टीएचडीसी (THDC) के संयुक्त उद्यम वाले इस प्रोजेक्ट में नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए गए।
राजनीतिक हलकों में बेचैनी और दस्तावेजों के लीक होने पर सवाल
इससे उत्तराखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बेचैनी फैल गई और सवाल उठने लगे कि ये डॉक्यूमेंट्स विपक्षी पार्टी तक कैसे पहुंचे। यहां AICC मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, खेड़ा ने थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़े कई डॉक्यूमेंट्स सार्वजनिक किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये डॉक्यूमेंट्स नौकरशाही के भीतर के अधिकारियों द्वारा लीक किए गए थे।
कांग्रेस नेताओं के दावे और अधिकारियों की भूमिका पर बयान
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पहले दावा किया है कि उन्हें सरकारी अधिकारियों के माध्यम से आंतरिक जानकारी मिल रही है। खेड़ा ने पूछा, "आपको क्या लगता है कि हमें ये कागजात किसने दिए?" उन्होंने कहा कि ये डॉक्यूमेंट्स अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि चुनावों से पहले कुछ अधिकारियों की "अंतरात्मा जाग जाती है", जबकि अन्य को चिंताएं हो सकती हैं लेकिन उनमें बोलने की हिम्मत नहीं होती।
सड़क से लेकर चुनाव तक लड़ाई लड़ने का ऐलान
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस "इस लड़ाई को सड़कों पर लड़ेगी और चुनाव जीतेगी" और अगर सत्ता में आई तो अपने कार्यों से एक मिसाल कायम करेगी। कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुखता से वे डॉक्यूमेंट्स दिखाए जिनके बारे में उनका दावा था कि वे राज्य की नौकरशाही से लीक हुए थे।
राज्य प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल
प्रस्तावित थर्मल पावर प्रोजेक्ट को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाकर और नौकरशाही के भीतर "लीक" का आरोप लगाकर, खेड़ा ने बहस का रुख राज्य प्रशासन के कामकाज की ओर भी मोड़ दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी सरकार के तहत नौकरशाही में आंतरिक मतभेद हैं और क्या कथित प्रशासनिक खींचतान पुष्कर सिंह धामी सरकार तक पहुंच गई है।
प्रोजेक्ट की मूल योजना और केंद्र की मंजूरी का दावा
खेड़ा के अनुसार, 1,320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट को शुरू में "UJVNL और THDC" के बीच एक संयुक्त उद्यम (joint venture) के माध्यम से विकसित करने की योजना थी। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2024 में केंद्र से इस प्रोजेक्ट के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बाद में समय-सीमा को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए PSU के नेतृत्व वाले इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया, जिसके बाद बिजली खरीद के लिए एक नया तरीका अपनाया गया। (Source: ANI)
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