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अवैध सड़क और रेत खनन पर NGT सख्त

दिल्ली-गाजियाबाद यमुना में अवैध सड़क और रेत खनन पर NGT सख्त, कई वरिष्ठ अधिकारी तलब

यमुना में कथित अवैध सड़क निर्माण और रेत खनन मामले में NGT ने दिल्ली-UP के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली-गाजियाबाद यमुना में अवैध सड़क और रेत खनन पर ngt सख्त कई वरिष्ठ अधिकारी तलब

NGT Summons Senior Officials Over Illegal Road, Sand Mining in Yamuna |

नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली और गाज़ियाबाद के बीच यमुना नदी पर कथित तौर पर अवैध तरीके से सड़क बनाने और रेत खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को मामले में प्रतिवादी बनाया है। साथ ही, संबंधित अधिकारियों से अगली सुनवाई से पहले इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।

जिला मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब

NGT ने बागपत, गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद और दिल्ली के ज़िला मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होने कहा कि अगली सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले अपना जवाब दाखिल करें। ये निर्देश तब जारी किए गए जब ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस मामले में कई ऐसे पहलुओं पर और सुनवाई की जरूरत है जिन पर पिछली बहस के दौरान ठीक से ध्यान नहीं दिया गया था।

यमुना पर सड़क बनाने की खबर से जुड़ा है मामला

यह मामला 30 नवंबर, 2024 को छपी एक न्यूज रिपोर्ट से जुड़ा है जिसका शीर्षक था "How Sand Miners Laid Road Across Yamuna Between Delhi and Ghaziabad" (रेत खनन करने वालों ने दिल्ली और गाज़ियाबाद के बीच यमुना पर सड़क कैसे बनाई)।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि उसे बागपत के ज़िला मजिस्ट्रेट, बागपत के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), गौतम बुद्ध नगर के ज़िला मजिस्ट्रेट, गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, गाज़ियाबाद के पुलिस कमिश्नर, और दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले के जिला मजिस्ट्रेट की बात सुननी है।

सात अधिकारियों को प्रतिवादी बनाकर नोटिस जारी करने का निर्देश

इन अधिकारियों को अब 11 से 17 नंबर के प्रतिवादी के तौर पर शामिल किया गया है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह पक्षकारों की सूची (मेमो ऑफ पार्टीज) में बदलाव करे और उन्हें नोटिस जारी करे। ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त कार्य बल (Joint Task Force) के गठन, कार्य बल की तिमाही बैठकों, बैठकों की पूरी जानकारी और मिनट्स (कार्यवृत्त) को अपलोड करने, अंतर-राज्यीय क्षेत्रों में खनन, संयुक्त गश्त और अवैध खनन को रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर और विचार करने की जरूरत है।

पिछली बहस में छूटे पहलुओं पर NGT ने मांगी आगे सुनवाई

NGT ने गौर किया कि पिछली बहस के दौरान इन पहलुओं का जिक्र नहीं किया गया था या उन पर पर्याप्त रूप से ध्यान नहीं दिया गया था, और कहा कि इनकी सही व्याख्या और विचार के लिए और सुनवाई जरूरी है। इस मामले की सुनवाई पहले 8 मई, 2026 को हुई थी, जब बहस पूरी हो गई थी और आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। हालांकि, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने कहा कि मामले में और सुनवाई की जरूरत है।

15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले में आगे की सुनवाई 15 सितंबर को होगी। यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार त्यागी (ज्यूडिशियल मेंबर) और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज़ अहमद की बेंच ने दिया। (Source: ANI)

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