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छोटे भुगतान में UPI अव्वल

NPCI ने कैशलेस भुगतान के लिए UPI Help लॉन्च किया

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) भुगतान को आसान बनाने के लिए पर डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने के लिए एक नया AI संचालित सहायक UPI Help लॉन्च किया।

npci ने कैशलेस भुगतान के लिए  upi help लॉन्च किया

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NPCI ने कैशलेस भुगतान के लिए "UPI Help" लॉन्च किया

छोटे भुगतान में UPI अव्वल, बड़े पेमेंट में "आरटीजीएस" पर ही है भरोसा

नई दिल्ली। 
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस यूपीआई (UPI) भुगतान को आसान बनाने के लिए पर डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने के लिए एक नया AI संचालित सहायक UPI Help लॉन्च किया है। यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित सहायक है जिसे उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाने और डिजिटल भुगतान-संबंधित इंटरैक्शन को सरल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नया सहायक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस इकोसिस्टम को लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सुलभ, पारदर्शी और कुशल बनाने का लक्ष्य कर डिजाइन किया गया है।

मालूम हो कि भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) कैशलेस खरीद फरोख्त में पेमेंट का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन कर उभरा है। आनलाइन पेमेंट के इस माध्यम में प्रमुख रूप से "गूगल पे"  और  "एटीएम" आते हैं। लेकिन इस माध्यम से छोटे भुगतान ज्यादा हो रहे हैं। बड़ी धनराशि के भुगतान में लोग "आरटीजीएस" पर ही ज्यादा भरोसा करते हैं। ये जानकारी रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों से सामने आयी है।

यूपीआई देश में कैशलेस डिजिटल भुगतान के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में सामने आया है। कोरोना के बाद ये आम आदमी के दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। 2025 की पहली छमाही में डिजिटल भुगतान की कुल संख्या में 85 प्रतिशत भुगतान यूपीआई से हुआ है। इस्तेमाल में आसान होने, दक्षता और हमेशा उपलब्धता के कारण यूपीआई भारत में व्यापक दौर पर खुदरा भुगतान में इस्तेमाल हो रहा है। यूपीआई भुगतान में "फोनपे" का  शेयर सबसे ज़्यादा (47.25%) है, जबकि "गूगलपे" का शेयर 36.04% है।  इन दोनों ऐप्स का मिलाकर 83% मार्केट शेयर है। लेकिन मूल्य के हिसाब से देखें तो यूपीआई की कुल भुगतान में हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है, जिससे पता चलता है कि यूपीआई के माध्यम से छोटे लेनदेन ही हुए हैं।

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में यूपीआई से 1,079 करोड़ भुगतान हुआ था, जो 2024 में बढ़कर 17,221 करोड़ तक पहुंच गया है। इस कैशलेस माध्यम से लेनदेन का कुल मूल्य 2019 में 18.4 लाख करोड़ रुपये था जो साल 2024 में बढ़कर 246.8 लाख करोड़ रुपये हो गया है। साल 2025 की पहली छमाही में यूपीआई से कुल लेनदेन 10,637 करोड़ और इसका मूल्य 143.3 लाख करोड़ रुपये रहा है।

देश की बैंकिंग व्यवस्था के तहत वित्तीय लेन देन में रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) द्वारा भुगतान का हिस्सा सबसे ज्यादा 69 प्रतिशत है। लेकिन संख्या के हिसाब से देखा जाए तो यह महज 0.1 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि आरटीजीएस का उपयोग मोटी धनराशि के भुगतान में अधिक होता है। थोक भुगतान में इसे तरजीह दी जाती है, जिसमें न्यूनतम भुगतान की राशि 2 लाख रुपये है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान संख्या के हिसाब से आरटीजीएस से लेनदेन 13.70 प्रतिशत और वाल्यूम के हिसाब से लेनदेन 13.78 प्रतिशत बढ़ारिपोर्ट में कहा गया है, 'आरटीजीएस से लेनदेन मुख्यतः है।

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