पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऊर्जा संकट और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए Narendra Modi ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सोने की खरीदारी सीमित रखने, उर्वरकों का कम इस्तेमाल करने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की अपील की है।
खपत में गिरावट की आशंका
पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा संकट की वजह से रोजमर्रा की वस्तुओं की मांग में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर देश की आर्थिक गतिविधियों और विकास दर पर पड़ सकता है।
मूडीज ने घटाया विकास दर का अनुमान
Moody's Ratings ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कटौती करते हुए वर्ष 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा लागत, निजी खपत में कमजोरी और औद्योगिक गतिविधियों की धीमी रफ्तार इसके प्रमुख कारण हैं। मूडीज ने अपनी ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा है कि अगले कुछ महीनों तक ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। एजेंसी ने 2027 के विकास दर अनुमान में भी कटौती की है।
‘तीन C’ बने चिंता की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था पर इस समय तीन बड़े कारकों का दबाव है — क्रूड (कच्चा तेल), कंजम्पशन (खपत) और करेंसी (मुद्रा)। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ रहा है, वहीं महंगाई बढ़ने के कारण लोगों की खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिच ने महंगाई को लेकर दी चेतावनी
Fitch Ratings ने चेतावनी दी है कि तेल आयात महंगा होने की वजह से भारत में महंगाई दर बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर तेजी से दिखाई देता है।
दूसरी एजेंसियों ने भी घटाए अनुमान
मूडीज के अलावा कई अन्य वैश्विक एजेंसियों ने भी भारत की विकास दर के अनुमान में कटौती की है।
- HSBC ने विकास दर का अनुमान 7.4% से घटाकर 6% किया।
- S&P Global ने 7.1% से घटाकर 6.6% का अनुमान दिया।
- BMI ने 7.7% से घटाकर 6.7% किया।
- Nomura ने 7% की जगह 6.8% वृद्धि दर का अनुमान जताया है।
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