पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर केंद्र सरकार की चुप्पी के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने सोमवार को संसद भवन के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर केंद्र सरकार की चुप्पी के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने सोमवार को संसद भवन के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी संसद के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए।
जयराम रमेश ने चर्चा न होने पर जताई नाराजगी
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने विपक्षी के वॉक-आउट करने को सही ठहराते हुए कहा कि, "जैसा कि उम्मीद थी, विदेश मंत्री ने राज्यसभा में हालात पर खुद से बयान दिया, जिस पर कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता या कोई सफाई नहीं मांगी जा सकती। पूरा विपक्ष पश्चिम एशिया के हालात पर तुरंत चर्चा चाहता था। इससे मना कर दिया गया और इसलिए प्रदर्शन के बाद वॉकआउट करने का निर्णय लिया गया।"
विपक्ष ने मांगी सवाल पूछने की अनुमति
यह तब हुआ जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के हालात पर राज्यसभा में बयान दिया, जबकि विपक्ष ने केंद्र से सवाल पूछने के लिए चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच संसद के ऊपरी सदन को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा कि "प्रधानमंत्री नए घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय से प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं।"
सरकार ने दोहराई संयम और कूटनीति की अपील
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। हमारा मानना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।" बयान से पहले, मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर राज्यसभा में थोड़ी देर की चर्चा की मांग की थी। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी पर ध्यान दिलाते हुए, खड़गे ने कहा कि संघर्ष ने भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और देश की छवि पर असर डाला है।"
खड़गे ने उठाया ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई का मुद्दा
खड़गे ने कहा, "मैं भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए उभरती चुनौतियों पर एक संक्षिप्त चर्चा चाहता हूं। यह लड़ाई केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, इसने अब भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और देश की छवि पर असर डाला है। इस लड़ाई का नतीजा हमारी इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर भी पड़ेगा।"
ईरान पर हमलों के बाद बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम उस युद्ध के बाद हुआ है, जो 28 फरवरी को ईरान पर US-इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुई थी। इससे पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और रूलिंग ग्रुप के कई कोर मेंबर मारे गए थे। तब से हालात और बिगड़ गए हैं। सप्ताहांत में ऑयल डिपो और वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर नए हमले होने की खबरें हैं।
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