PM Modi : पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि श्री सत्य साई बाबा का यह जन्मशताब्दी वर्ष हमारी पीढ़ी के लिए सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक दिव्य वरदान है. आज भले ही वे हमारे बीच दैहिक स्वरूप में नहीं.
पीएम मोदी बोले, 'सत्य साई बाबा का यह जन्मशताब्दी वर्ष एक दिव्य वरदान' स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया |
PM Modi : पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि श्री सत्य साई बाबा का यह जन्मशताब्दी वर्ष हमारी पीढ़ी के लिए सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक दिव्य वरदान है. आज भले ही वे हमारे बीच दैहिक स्वरूप में नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षा, उनका प्रेम, उनकी सेवा भावना आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रही हैं. पीएम मोदी और सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने पुट्टपर्थी में श्री सत्य साईं बाबा के जीवन और शिक्षाओं को समर्पित एक स्मारक सिक्का और डाक टिकटों का एक सेट जारी किया.
उन्होंने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा का जीवन "वसुधैव कुटुम्बकम" का जीवन स्वरूप था, इसलिए उनका ये जन्म शताब्दी वर्ष हमारे लिए सार्वभौमिक प्रेम, शांति और सेवा का महापर्व बन गया है.
पीएम मोदी ने कहा कि यह हमारी सरकार के लिए सम्मान की बात है कि इस अवसर पर ₹100 का स्मारक सिक्का और एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया है. इस अवसर पर मैं सभी भक्तों और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. हमारी सभी विविध आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराएँ अंततः इसी एक आदर्श की ओर ले जाती हैं. चाहे कोई भक्ति, ज्ञान या कर्म के मार्ग पर चले, प्रत्येक सेवा से जुड़ा है.
'वे अक्सर कहते थे, सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो'
उन्होंने कहा कि सभी प्राणियों में विद्यमान ईश्वर की सेवा के बिना भक्ति क्या है? ज्ञान क्या है? यदि वह दूसरों के प्रति करुणा नहीं जगाता? कर्म क्या है? यदि वह अपने कर्म को समाज की सेवा के रूप में अर्पित करने की भावना नहीं है? सेवा परमो धर्मः वह लोकाचार है, जिसने सदियों से चले आ रहे परिवर्तनों और चुनौतियों के बीच भारत को बनाए रखा है. इसने हमारी सभ्यता को उसकी आंतरिक शक्ति प्रदान की है. हमारे कई महान संतों और सुधारकों ने इस शाश्वत संदेश को आगे बढ़ाया है. श्री सत्य साईं बाबा ने सेवा को मानव जीवन के मूल में रखा. वे अक्सर कहते थे, सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो.
पीएम मोदी ने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा का संदेश केवल पुस्तकों, प्रवचनों और आश्रमों की सीमाओं में नहीं रहा है. उनकी शिक्षा का प्रभाव लोगों के बीच दिखता है. आज भारत के शहरों से लेकर छोटे गांवों तक, स्कूलों से लेकर आदिवासी बस्तियों तक, संस्कृति, शिक्षा और चिकित्सा सेवा का एक अद्भुत प्रवाह दिखाई देता है. ये बाबा के अनुयायियों के सबसे बड़ा आदर्श है.
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