अयोध्या में प्रमुख न्यासियों के इस्तीफे और 8 लोगों के हिरासत में भेजे जाने से राजनीतिक बवाल मच गया।
नई दिल्ली,(भारत)। श्री राम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। शुक्रवार को इस मामले ने नया मोड़ लिया, जब मंदिर ट्रस्ट के दो वरिष्ठ न्यासियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कथित करोड़ों रुपये के गबन के आरोप में आठ आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दान राशि की कथित हेराफेरी में मंदिर और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोपों के बाद विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट से जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। वहीं, यह मुद्दा अब भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया है।
आरोपियों के पास से लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान राशि गबन मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम 25 जून को भारतीय न्याय संहिता के तहत धन के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद उठाया गया। शुक्रवार को अयोध्या की विशेष अदालत ने इस मामले में सरकारी कर्मचारियों और भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों समेत आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों के पास से लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सरकार और ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, कि यह मामला भक्तों के विश्वास के साथ विश्वासघात का प्रतीक है और इसे लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और मंदिर प्रशासन पर साधा निशाना
इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा और मंदिर प्रशासन को निशाने पर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया, कि कथित दान राशि घोटाले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है और वही लोग अब खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा, कि करोड़ों लोगों की भगवान राम में गहरी आस्था है और इस तरह के आरोपों से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
संजय सिंह ने X पर लिखा “छोटी राजनीति”
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मंदिर प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने केजरीवाल की हालिया अयोध्या यात्रा की आधिकारिक तस्वीरें जारी नहीं कीं और इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने दावा किया, कि अरविंद केजरीवाल की अयोध्या यात्रा के दौरान आधिकारिक फोटोग्राफर द्वारा ली गई तस्वीरें उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गईं। सिंह के अनुसार, फोटोग्राफर ने दर्शन के बाद तस्वीरें साझा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कई बार अनुरोध करने के बावजूद वे तस्वीरें जारी नहीं की गईं। इस पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए इसे “छोटी राजनीति” करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट से इस प्रकरण में जांच कराने की मांग
इस मामले पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से इस प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया, कि इस घटना ने भाजपा और आरएसएस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खुलासे ने खुद को धर्म का रक्षक बताने वालों को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा, कि आम श्रद्धालुओं के योगदान का दुरुपयोग हुआ है और इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ट्रस्टियों के इस्तीफे घोटाले का केवल सिर
सीपीआई महासचिव डी. राजा ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे केवल शुरुआती घटनाक्रम बताया है। उन्होंने कहा, कि दो ट्रस्टियों के इस्तीफे इस कथित घोटाले का केवल सिर हैं और पूरे मामले की गहन जांच की जरूरत है। राजा ने आरोप लगाया, कि अयोध्या में कथित गबन और अनियमितताओं की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित लूट गंभीर चिंता का विषय है और इस पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियों से किया जाए परहेज
इस बीच, सत्ताधारी दल ने विपक्ष द्वारा मामले के राजनीतिकरण का विरोध किया है। सरकार और भाजपा का कहना है, कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कि सरकार की मंशा स्पष्ट है और जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है। उन्होंने अपील की, कि राम भक्तों की आस्था को लेकर किसी भी तरह की राजनीति या बयानबाजी से बचा जाए। योगी ने कहा, कि यदि किसी के पास तथ्य या सबूत हैं, तो उन्हें एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, अन्यथा आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। योगी ने यह भी स्पष्ट किया, कि सरकार एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई कर रही है और जब तक जांच जारी है, इस विषय पर अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियों से परहेज किया जाना चाहिए।
मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, एफआईआर दर्ज कर ली गई है। भाजपा नेता नीरज सिंह ने इसे “निःसंदेह शर्मनाक” बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की त्वरित कार्रवाई की सराहना की और कहा कि एसआईटी जांच कर रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने भी इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। कानूनी विशेषज्ञ अधिवक्ता हरि शंकर और विष्णु शंकर जैन ने देवता की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यवस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने अनावश्यक समितियों के गठन के बजाय मंदिर प्रशासन को मजबूत करने की सलाह दी है। इस बीच, मामले में कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में
अयोध्या की एक विशेष अदालत ने राम मंदिर चंदा कथित गबन मामले में आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा के अनुसार, एक आरोपी को छोड़कर बाकी सभी से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सरकारी कर्मचारी और भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी शामिल हैं। इस मामले में गिरफ्तार लोगों में अविनाश शुक्ला, अंकलप मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामा शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामा शंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं।
25 जून को राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में हुई थी एफआईआर दर्ज
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर 25 जून को राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में मंदिर कर्मचारियों पर दान राशि के प्रबंधन में आपराधिक साजिश रचने और व्यवस्थित गबन के आरोप लगाए गए हैं। एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। यह मामला न केवल एक बड़े धार्मिक स्थल के प्रबंधन में पारदर्शिता का प्रश्न बन गया है, बल्कि लगातार जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा में बना हुआ है। (एएनआई)
यह भी पढ़ेंः कूल लुक से लेकर जेंडर-फ्लुइड स्टाइल तक, तेजी से बदल रही है युवाओं की पसंद