देश में कमजोर मॉनसून की आशंका और आयात में गिरावट को देखते हुए आने वाले दिनों में दालों की आपूर्ति में कमी की आशंका है। इससे कीमतों में उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है।
नई दिल्ली। देश में कमजोर मॉनसून की आशंका और आयात में गिरावट को देखते हुए आने वाले दिनों में दालों की आपूर्ति में कमी की आशंका है। इससे कीमतों में उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति में आयी बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि लागत बढ़ गयी है। वैश्विक स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण हाल के महीनों में दालों के आयात में गिरावट दर्ज की गई है। देश में दालों के स्टॉक को देखते हुए आयात में लगातार गिरावट अब चिंता का कारण बनने लगी है।
दाल आयात में बड़ी गिरावट दर्ज
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दाल आयात 34 प्रतिशत घटकर 3.63 अरब डॉलर रह गया है। पिछले वित्त वर्ष में यह 5.54 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था। मात्रा के हिसाब से भी आयात में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर कम उत्पादन और उच्च माल भाड़े (freight costs) के कारण दालों के आयात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 35% से 40% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कमजोर मॉनसून से उत्पादन पर खतरा
इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो के प्रभाव के कारण दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया है। इस वजह से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इस बार मॉनसून सामान्य से कमजोर रहा या फसल प्रभावित हुई तो घरेलू उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के पास बफर स्टॉक होने के बावजूद खुदरा बाजार में दालों के दाम बढने की आशंका रहेगी। पहले भी कम उत्पादन और सीमित आयात के कारण अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेज उछाल देखा जा चुका है।
दालों के दाम बढ़ने की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर घरेलू उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा तो आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रहा या फसल प्रभावित हुई तो घरेलू उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के पास बफर स्टॉक होने के बावजूद खुदरा बाजार में दालों के दाम बढने की आशंका रहेगी। पहले भी कम उत्पादन और सीमित आयात के कारण अरहर, उड़द और मसूर की कीमतों में तेज उछाल देखा जा चुका है।
अलग-अलग दालों के आयात में गिरावट
एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाली पीली मटर की वैश्विक कीमतों में कमी आई है, लेकिन भारत में आयात घटने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं मसूर और पीली मटर के आयात में क्रमशः 6 प्रतिशत और 47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर उड़द और अरहर के आयात में कुछ बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन वह कुल मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
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