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डिजिटल यूपीआई फ्रॉड रोकने को RBI की बड़ी पहल

डिजीटल यूपीआई फ्राड रोकने के लिए रिजर्व बैंक की बड़ी पहल

Reserve Bank of India (RBI) ने डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है।

डिजीटल यूपीआई फ्राड रोकने के लिए रिजर्व बैंक की बड़ी पहल

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नई दिल्ली: Reserve Bank of India (RBI) ने डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। प्रस्तावित नियम के तहत ₹10,000 से अधिक के UPI भुगतान को तुरंत पूरा करने के बजाय 1 घंटे के लिए होल्ड पर रखा जा सकता है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

क्या है नया नियम?

आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, 10,000 रुपये से अधिक राशि के अकाउंट-से-अकाउंट ट्रांसफर पर “कूलिंग पीरियड” लागू किया जाएगा। इस दौरान पैसा खाते से अस्थायी रूप से कट जाएगा, लेकिन ग्राहक चाहें तो इस समय के भीतर ट्रांजैक्शन को रद्द भी कर सकेंगे।

फ्रॉड रोकने के लिए अहम कदम

देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। आरबीआई का मानना है कि 1 घंटे का समय मिलने से यूजर्स को संदिग्ध ट्रांजैक्शन पहचानने और उसे रोकने का मौका मिलेगा।

तेजी से बढ़ रहे हैं फ्रॉड के मामले

आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां ₹551 करोड़ के फ्रॉड केस सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर ₹22,000 करोड़ से अधिक हो गए हैं। खास बात यह है कि ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड वैल्यू का लगभग 98% हिस्सा हैं।

APP फ्रॉड पर लगेगी लगाम

आरबीआई के अनुसार, आजकल अधिकतर धोखाधड़ी तकनीकी हैकिंग से नहीं, बल्कि यूजर्स को बहलाकर या डराकर की जाती है। इसे ऑथराइज्ड पुश पेमेंट (APP) फ्रॉड कहा जाता है, जिसमें यूजर खुद ही पैसे ट्रांसफर कर देता है। 1 घंटे का गैप ऐसे मामलों में बड़ा फर्क ला सकता है।

सीनियर सिटीज़न के लिए खास सुरक्षा

आरबीआई 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए “ट्रस्टेड पर्सन” की अनुमति जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। साथ ही “किल स्विच” फीचर लाने की योजना है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत डिजिटल पेमेंट बंद किया जा सके।

कुछ ट्रांजैक्शन रहेंगे बाहर

रोजमर्रा के भुगतान जैसे मर्चेंट पेमेंट, ऑटो-डेबिट (ई-मैंडेट) और चेक से जुड़े लेनदेन इस नियम से बाहर रखे जा सकते हैं। इसके अलावा, व्हाइटलिस्ट फीचर के जरिए भरोसेमंद खातों के लिए देरी से छूट भी मिल सकती है।

सेफ्टी बनाम स्पीड का संतुलन

जहां इस फैसले का स्वागत हो रहा है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेज़ स्पीड है। ऐसे में आरबीआई को सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर यह नियम लागू होता है, तो भले ही आपको ट्रांजैक्शन के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़े… लेकिन इससे आपका पैसा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा।

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