RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
मुंबई (महाराष्ट्र)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नीतिगत रेपो रेट में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख (Policy Stance) में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती का कोई विकल्प नहीं है।
Key Highlights (स्टोरी हाईलाइट्स)
- रेपो रेट में बढ़ोतरी: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नीतिगत रेपो रेट में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
- ब्याज दरों में कटौती से इनकार: केंद्रीय बैंक ने अपने रुख में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का कोई विकल्प नहीं है।
- महंगाई और जीडीपी का अनुमान: RBI का अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन 5.8% रहेगी, जबकि FY27 के लिए वास्तविक GDP विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है।
- लिक्विडिटी नियंत्रण: बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस लिक्विडिटी को चालू वित्त वर्ष के दौरान प्राकृतिक और RBI के उपायों से सोख लिया जाएगा।
MPC बैठकों में 50 bps पर भी हुआ था विचार
मुंबई में मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुलासा किया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने रेपो रेट में 50 bps की बढ़ोतरी पर भी विचार किया था, लेकिन अंत में 25 bps की वृद्धि का निर्णय लिया गया।
गवर्नर ने कहा, "हम सभी संभावनाओं पर चर्चा करते हैं और उसके बाद तय करते हैं कि मॉनेटरी पॉलिसी का सही फैसला क्या होगा।" केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपनी पॉलिसी की दिशा में बदलाव किया है। इससे संकेत मिलता है कि अगला कदम या तो फिर से रेट बढ़ाना हो सकता है या फिर इसे रोककर रखना (पॉज़), जो विकास और महंगाई की बदलती स्थितियों पर निर्भर करेगा।
निकट भविष्य में ब्याज दरें घटने से इनकार
गवर्नर ने यह भी साफ किया कि RBI निकट भविष्य में रेट में कटौती को कोई विकल्प नहीं मानता है। उन्होंने कहा, "हमने अपनी पॉलिसी की दिशा बदलकर यह साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में रेट में कोई कटौती नहीं होगी। हम या तो रेट को रोककर रखने या उसे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में रेट में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल और ग्रोथ-इंफ्लेशन डायनेमिक्स में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।
महंगाई और जीडीपी ग्रोथ पर RBI की नजर
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब RBI को उम्मीद है कि महंगाई का स्तर ऊंचा बना रहेगा। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन लगभग 5.8 प्रतिशत रहेगी। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए अपनी वास्तविक GDP विकास दर का अनुमान भी बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है, जो संकेत देता है कि मज़बूत आर्थिक गतिविधियों के कारण MPC के पास महंगाई के जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करने की पर्याप्त गुंजाइश है।
मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि मॉनेटरी पॉलिसी की भविष्य की दिशा तय करते समय RBI केवल हेडलाइन महंगाई पर निर्भर नहीं रहेगा। इसके साथ ही अंडरलाइंग महंगाई, कोर महंगाई और डिफ्यूज़न इंडेक्स का भी आकलन किया जाएगा ताकि यह परखा जा सके कि कीमतों का दबाव कितना व्यापक और लगातार है।
FCNR(B) डिपॉजिट और बैंकिंग लिक्विडिटी
गवर्नर की टिप्पणियों में बैंकिंग सिस्टम में मौजूदा लिक्विडिटी सरप्लस (अतिरिक्त नकदी) में FCNR(B) डिपॉज़िट की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। मल्होत्रा ने कहा कि बैंक पहले से ही FCNR(B) डिपॉजिट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका सबूत मजबूत क्रेडिट ग्रोथ से मिलता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बैंकों को इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल करने के लिए समय चाहिए होगा और वे इसे रातों-रात खर्च नहीं कर सकते। बैंकों को उचित ड्यू डिलिजेंस (जांच-पड़ताल) पूरी करने के बाद ही इन फंड्स का उपयोग करना चाहिए।
लिक्विडिटी नियंत्रण और आगामी MPC बैठक
बड़ी मात्रा में आए इन फंड्स से बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी बनी है, लेकिन गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिकेगी। मौजूदा वित्तीय वर्ष के भीतर ही नैचुरल और RBI के उपायों के माध्यम से इस लिक्विडिटी को सोख लिया जाएगा।
गवर्नर ने कहा कि CIC लीकेज के माध्यम से वित्तीय वर्ष के दौरान तीन से चार लाख करोड़ रुपये तक की लिक्विडिटी स्वतः समायोजित हो सकती है। RBI की अगली MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर के बीच निर्धारित है, जबकि अक्टूबर की बैठक के मिनट्स (कार्यवाही का विवरण) आगामी 21 अक्टूबर को जारी किए जाएंगे।
प्रभाव विश्लेषण / Smart FAQ
1. रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट में 25 bps की बढ़ोतरी से बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है। इसका असर नए लोन की ब्याज दरों और कुछ मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन की EMI पर पड़ सकता है। वहीं, FD जैसी जमा योजनाओं पर बेहतर ब्याज मिलने की संभावना बन सकती है।
2. क्या आने वाले महीनों में होम लोन की EMI कम होगी?
फिलहाल इसकी संभावना कम है। RBI ने स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में रेट कटौती विकल्प में नहीं है। अगला कदम दरों को स्थिर रखना या जरूरत पड़ने पर फिर बढ़ाना हो सकता है।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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