बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया जल्द ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.75-95.75 की रेंज में ट्रेड कर सकता है।
नई दिल्ली [इंडिया]: बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया जल्द ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.75-95.75 की रेंज में ट्रेड कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतें रुपये की आगे की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2026 में ग्लोबल तेल की ऊंची कीमतों, ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लगातार आउटफ्लो के कारण रुपये पर बाहरी दबाव बढ़ सकता है। इसमें कहा गया है, "तेल की ऊंची कीमतें एक बड़ा फैक्टर हैं, जो आगे INR की चाल तय करेंगी। कुल मिलाकर, हमें उम्मीद है कि INR जल्द ही 94.75-95.75/USD की रेंज में ट्रेड करेगा।"
RBI के कदमों से रुपये को मिली राहत
इस बैकग्राउंड में, महीने की शुरुआत में भारतीय करेंसी में तेजी से गिरावट आई और यह अपने लाइफटाइम लो के आसपास पहुंच गई। इस भारी गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पॉट मार्केट में रुपये को सपोर्ट देने के लिए कुछ कदम उठाए। इनमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए अलग डॉलर विंडो शामिल है। इसके अलावा सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग गतिविधियों को रोकने के लिए भी कदम उठाए गए। इन उपायों के बाद रुपये में जोरदार रिकवरी हुई और यह 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। हालांकि, तेल की बढ़ी हुई कीमतों, ग्लोबल फाइनेंशियल हालात में उतार-चढ़ाव, मजबूत डॉलर और FPI के लगातार आउटफ्लो ने करेंसी पर फिर से दबाव डाला।
अक्टूबर में 0.9 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ रुपया
चुनौतियों के बावजूद अक्टूबर 2026 में रुपया 0.9 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि करेंसी ने मजबूती दिखाई है, जिसका बड़ा कारण RBI से मिला सपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में रुपये की चाल फंडामेंटल्स के बजाय मार्केट सेंटिमेंट से ज्यादा तय होने की संभावना है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात में उतार-चढ़ाव, यील्ड डिफरेंशियल में कमी, निवेशकों का जोखिम से बचना, FPI का आउटफ्लो और तेल की ज्यादा कीमतों से करेंसी पर दबाव पड़ने की आशंका है। इसमें यह भी कहा गया है कि रुपये पर और ज्यादा गिरावट का दबाव बनने के जोखिम बने हुए हैं। हालांकि, RBI के उपायों से करेंसी को कुछ सपोर्ट मिला है और सेंट्रल बैंक ने यह संकेत दिया है कि वह एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव को सीमित और एक दायरे में रखने के लिए प्रतिबद्ध है। रिपोर्ट में कहा गया है, "RBI के उपायों से INR को समय पर बूस्ट मिला, साथ ही मार्केट को यह भी संकेत मिला कि सेंट्रल बैंक यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव ठीक-ठाक और रेंज-बाउंड रहे। अगर कोई नया बाहरी झटका नहीं आता है, तो यह INR के पक्ष में काम करता रहेगा।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सेंट्रल बैंक के उपायों से भले ही रुपये को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन इसका आउटलुक काफी हद तक बाहरी फैक्टर्स, खासकर ग्लोबल तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा।
(ANI)
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