पश्चिम बंगाल में एसआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश से वोटरों को बड़ी राहत मिली है।
सुनवाई में बीएलए भी वोटर के साथ मौजूद हो सकते है
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश से वोटरों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई में चुनाव आयोग को लाजिकल डिसक्रिपेंसी के तहत एक करोड़ 36 लाख वोटरों की सूची को पंचायत, प्रखंड व बूथ स्तर तक कार्यालयों में तीन दिन में टांगना होगा और सुनवाई को 10 दिन में पूरा करने का निर्देश दिया है। सुप्रमि कोर्ट ने स्वस्थ तरीके से वोटरों की सूची में संशोधन करना जरूरी माना है। सुप्रीम कोर्ट दो सप्ताह के बाद मामले की फिर सुनवाई करेगा। टीएमसी इसे अपनी बड़ी जीत मान रही है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि वोटरों की सुनवाई केंद्रों में वोटर अपनी सहायता के लिए बीएलए या अपने किसी जानकार या परिवार के किसी को साथ ले जा सकता है। लेकिन वोटर अपने साथ किसे ले जाएगा, उसे सुनवाई केंद्र के अधिकारियों को पहले जानकारी देनी होगी और अनुमति लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान लाजिकल डिसक्रिपेंसी वोटरों, सुनवाई आदि को लेकर हो रहे विरोध, तनाव-टकराव और अप्रिय घटनाओं पर भी गौर किया और उसकी ओर से केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यवस्था बाबत नोटिस देगा। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल मे एसआईआर की प्रक्रिया में तमाम कमियों, वोटरो के नाम को काटे जाने, सुनवाई में बीएलए को मौजूद रखने आदि मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से मांग करती रही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पांच पत्र लिखा। टीएमसी के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को की बार मांग पत्र सौंपा। चुनाव आयोग की ओर से उसकी मांग पूरी नहीं होने पर आखिर में वह सुप्रीम कोर्ट गई।
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