प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

सोलर घूस केस: निकांत को राहत

सोलर पॉवर परियोजना घूस कांड में निकांत के खिलाफ अवैध वसूली का मामला रद्द

सोलर घूस कांड में निकांत जैन पर दर्ज आपराधिक मामला हाईकोर्ट ने रद्द किया, IAS अभिषेक प्रकाश को भी राहत मिल सकती है।

सोलर पॉवर परियोजना घूस कांड में निकांत के खिलाफ अवैध वसूली का मामला रद्द

Solar Power Project |

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी को हिला देने वाले सोलर पॉवर परियोजना घूस कांड में आरोपी बनाए गए कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में चल रहे पूरे आपराधिक मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में निलंबित चल रहे यूपी के आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश को भी बड़ी राहत मिल सकती है।

लखनऊ पीठ का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में चल रहे पूरे आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने पाया कि शिकायत गलतफहमी पर आधारित थी और भ्रष्टाचार का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश निकांत जैन की याचिका पर दिया। राजधानी के गोमतीनगर थाने से संबंधित यह आपराधिक मामला प्रस्तावित सोलर पावर परियोजना से जुड़ा था।

शिकायत को बताया गया ‘गलतफहमी’

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि जांच में यह सामने आया कि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली या उसे “गलतफहमी” का नतीजा बताया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया है कि शिकायत गलतफहमी के आधार पर दर्ज कराई थी। अदालत ने नोट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि आरोपी ने किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की थी।

अभिषेक प्रकाश को मिल सकती है राहत

यूपी की ब्यूरोक्रेसी के इस चर्चित मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर नामित निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश (पूर्व CEO, Invest UP) को भी इस फैसले से कानूनी राहत मिलने की प्रबल संभावना है। अभिषेक प्रकाश पर आरोप था कि उनके कहने पर शिकायतकर्ता ने जैन से संपर्क किया था और मोटी घूस की मांग की गई थी। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था।

मार्च 2025 में दर्ज हुई थी एफआईआर

रिश्वत मामले में पुलिस ने निकांत जैन को 20 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही थी। मार्च 2025 में गोमती नगर थाने में एक सोलर कंपनी प्रतिनिधि द्वारा ₹7,000 करोड़ की परियोजना के लिए 5 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला दर्ज हुआ।

चार्जशीट और तलबी आदेश भी निरस्त

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले में भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया कोई अपराध बनता ही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट तथा 17 मई 2025 के तलबी आदेश को भी निरस्त कर दिया।

बचाव पक्ष की दलीलें

निकांत जैन की ओर से दलील दी गई कि आरोप अस्पष्ट, साक्ष्यविहीन और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता व प्रशासनिक भ्रम का नतीजा हैं। यह भी तर्क दिया गया कि न तो कोई धनराशि दी गई, न कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति सौंपी गई। विवेचना के दौरान कथित एक करोड़ रुपये नकद की कोई बरामदगी भी नहीं हुई। कोर्ट ने भी पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो कि अभियुक्त ने किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की हो।

यह भी पढ़े: शुभेंदु अधिकारी ने ERO-AERO को चेताया

https://www.primenewsnetwork.in/india/suvendu-adhikari-warns-ero-aero/140221

Related to this topic: