सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए आसाराम की अंतरिम मेडिकल जमानत याचिका पर सुनवाई 6 अगस्त को तय की है।
नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईएमएस) की उस मेडिकल रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है, कि धर्मगुरु और बलात्कार के दोषी आसाराम बापू को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सा निगरानी की जरूरत है।
आसाराम की जमानत याचिका पर 6 को सुनवाई
जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की उनकी याचिका पर सुनवाई 6 अगस्त को तय की। रिपोर्ट की जांच करते हुए बेंच ने टिप्पणी की, "रिपोर्ट के पहले भाग में कहा गया है, कि अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं है, फिर इसमें चौबीसों घंटे चिकित्सा देखभाल की बात कही गई है। हम इसे परसों सुनवाई के लिए रखेंगे।" 21 जुलाई को बेंच ने चिकित्सा आधार पर जमानत की उनकी याचिका पर विचार करते हुए एआईएमएस को आसाराम बापू की स्वास्थ्य स्थिति पर एक मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
2013 में मिली थी सजा
राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था और बेंच को बताया था कि आसाराम ने चिकित्सा आधार पर जमानत मिलने के बाद तीन महीने पहले अयोध्या और काशी का दौरा किया था। सर्वोच्च न्यायालय आसाराम की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग श्रद्धालु के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में उनकी सजा को बरकरार रखा गया था।
आसाराम बापू और दो सह-आरोपियों को दोषी ठहराया
उन्होंने अपील लंबित रहने तक अंतरिम जमानत की भी मांग की थी। निचली अदालत ने आसाराम बापू और दो सह-आरोपियों को दोषी ठहराया था। इस साल मई में, उच्च न्यायालय ने बलात्कार और संबंधित अपराधों के लिए आसाराम की सजा को बरकरार रखा; हालांकि, अदालत ने पाया कि आपराधिक साजिश और सामूहिक बलात्कार के आरोप साबित नहीं हुए और उन्हें इन अपराधों से बरी कर दिया। (इनपुट- ANI)
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