भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि आतंकवाद को “सरकारी नीति के औजार” के रूप में इस्तेमाल किया जाना कभी भी सामान्य नहीं माना जा सकता।
आतंकवाद को ‘सरकारी नीति’ का औजार बनाना अस्वीकार्य
संयुक्त राष्ट्र, 27 जनवरी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि आतंकवाद को “सरकारी नीति के औजार” के रूप में इस्तेमाल किया जाना कभी भी सामान्य नहीं माना जा सकता। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिशें अस्वीकार्य हैं।
यूएनएससी में भारत का सख्त रुख
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा पेश किए गए तथ्यों को “झूठा और स्वार्थपूर्ण” बताया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान एक निर्वाचित सदस्य के रूप में भी एक ही एजेंडा लेकर चलता है—भारत और उसके नागरिकों को नुकसान पहुंचाना।
‘न्यू नॉर्मल’ की कोशिश पर आपत्ति
भारत ने पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए ‘नयी सामान्य स्थिति (न्यू नॉर्मल)’ के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आतंकवाद को कभी भी सामान्य नहीं बनाया जा सकता। भारत का कहना था कि जिस तरह पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, उसे सहन करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर
भारत ने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई थी। इस हमले की सुरक्षा परिषद ने स्वयं कड़े शब्दों में निंदा की थी और दोषियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने की मांग की थी। इसी के तहत भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया गया।
भारत की कार्रवाई संतुलित और जिम्मेदार
भारत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई संतुलित, जिम्मेदार और तनाव न बढ़ाने वाली थी। इसका उद्देश्य केवल आतंकवादी ढांचों को नष्ट करना और आतंकवादियों को निष्क्रिय करना था, न कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना। भारत ने यह भी कहा कि भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से संघर्ष रोकने की अपील की गई थी, जो यह दर्शाता है कि किस पक्ष को वास्तविक नुकसान हुआ।
जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए भारत ने दो टूक कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस पर किसी बाहरी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं है।
सिंधु जल संधि पर भारत का पक्ष
भारत ने कहा कि सिंधु जल संधि 65 वर्ष पहले सद्भावना और मित्रता की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार युद्ध थोपकर और हजारों आतंकवादी हमले कर इस भावना का उल्लंघन किया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को मजबूरन यह घोषणा करनी पड़ी कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद और उसके सभी रूपों को विश्वसनीय व स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक संधि को स्थगित रखा जाएगा।
पाकिस्तान को आत्ममंथन की सलाह
भारत ने कहा कि कानून के शासन पर सवाल उठाने से पहले पाकिस्तान को अपने भीतर झांकना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान में संवैधानिक बदलावों और सैन्य नेतृत्व को दी गई कानूनी छूट का हवाला देते हुए इसे “संवैधानिक तख्तापलट” करार दिया।
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