उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार जिला समाज कल्याण अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है।
भ्रष्टाचार में यूपी के चार जिला समाज कल्याण अधिकारी बर्खास्त
श्रावस्ती, मथुरा, शाहजहांपुर और औरैया में सरकारी धन के फर्जीवाड़ा मामले में कार्रवाई
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में फर्जीवाड़ा कर सरकारी धन के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार जिला समाज कल्याण अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। उप्र लोक सेवा आयोग ने भी बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी है। साथ ही सेवानिवृत्त हो चुके भ्रष्टाचार के आरोपी तीन अधिकारियों से सरकारी रकम की वसूली के साथ पेंशन से स्थायी कटौती करने का निर्देश भी दिया गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य के समाज कल्याण विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहन जांच करायी गयी थी। यूपी के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण की निगरानी में हुई जांच के बाद श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव, मथुरा के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश स्थिती हापुड़ के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी संजय कुमार व्यास और शाहजहांपुर के तत्कालीन जिला समान कल्याण अधिकारी राजेश कुमार को बर्खास्त किया गया है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दे दिए हैं। इनमें से कुछ मामलों की फाइलें डेढ़ दशक से दबी हुई थीं।
समाज कल्याण विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार मीना श्रीवास्तव भदोही में तैनात भीं, जबकि एसके व्यास, राजेश कुमार और करुणेश त्रिपाठी निलंबित होने के बाद मुख्यालय से संबद्ध थे। इसके अलावा सेवानिवृत्त हो चुके चुके श्रीभगवान, विनोद शंकर तिवारी, उमा शंकर शर्मा से रिकवरी और पेंशन में कटौती होगी। सेवानिवृत अफसरों से होगी वसूली।
विभाग द्वारा करायी गयी जांच के बाद शासन को सौंपी गयी रिपोर्ट के अनुसार मीना श्रीवास्तव ने मार्च 2008 से अप्रैल 2012 तक श्रावस्ती में तैनाती के दौरान मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना के अंतर्गत मिले आवेदनों को बिना सक्षम स्तर से स्वीकृत कगए डाटा फीडिंग कराया। शादी बीमारी योजना में लाभार्थियों की स्वीकृत सूची में उनकी खाता संख्या में हेराफेरी की गयी। छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति को धनराशि को हड़पने में भी संलिप्तता मिली।
जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी ने मथुरा में तैनाती के दौरान निजी प्राइबेट आईटीआई सस्थानों को अनियमित तरीके से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया। 11 मान्यताविहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ की राशि का भुगतान छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में किया। निजी आईटीआई में 2 वर्ष की आयु के बच्चों से लेकर 51 वर्ष तक की आयु वाले व्यक्तियों को प्रवेश दिला कर राशि हड़पी। बर्खास्तगी के साथ उनसे 19.25 करोड़ रुपये की स्कूलों के निर्देश भी दिए गए हैं।
हापुड़ के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी संजय कुमार व्यास ने वित्त वर्ष 2012-13 में शासनादेश में दिए गए निर्देशों की अवहेलना करते हुए शिक्षण संस्थाओं से डेबिट अधरिटी लेटर लेकर छात्रवृति के 2.74 करोड़ रुपये छात्र छात्राओं के बैंक खातों में न भेजकर शिक्षण संस्थाओं के बैंक खाते में सीधे भेज दिए। हापुड़ में दशमोत्तर छात्रवृति व शुल्क प्रतिपूर्ति की विभागीय वेबसाइट पर छात्र-छात्राओं के अपलोड विवरण में से सूची प्रिंट कर उसमें फ्ल्यूड लगाकर अभिलेखों में फर्जीवाड़ा किया। बर्खास्तगी के साथ 3.23 करोड़ रुपये की वसूलों का निर्देश दिया गया है।
शाहजापुर के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार ने तैनाती के दौरान वित्त वर्ष 2022-23 में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेशन योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर अपात्रों को लाभ पहुंचाया। बर्खास्तगी के साथ 2.52 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी।
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