अमेरिका ने भारत के साथ चल रही ट्रेड डील की वार्ता के बीच बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने भारत से आयातित सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04% का शुरुआती एंटी-डम्पिंग टैरिफ़ लगा दिया है।
नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत के साथ चल रही ट्रेड डील की वार्ता के बीच बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने भारत से आयातित सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04% का शुरुआती एंटी-डम्पिंग टैरिफ़ लगा दिया है। इन उत्पादों पर पहले के टैरिफ़ को जोड़ लें, तो इन उत्पादों पर कुल टैरिफ़ 200% से ज़्यादा हो जाता है।
जांच के बाद कई भारतीय कंपनियां निशाने पर
अमेरिका में इस समय भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस बीच अमेरिका ने भारतीय सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04% की भारी-भरकम शुरुआती एंटी-डम्पिंग ड्यूटी लगाकर बड़ा झटका दिया है। यह कार्रवाई अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा 'क्रिटिकल सर्कमस्टेंस' (गंभीर हालात) की जांच के बाद की गई है, जो मुंद्रा सोलर एनर्जी, प्रीमियर एनर्जी सहित कई कंपनियों के निर्यात को प्रभावित करेगी। इस आदेश में चार कंपनियों का नाम है, जिनमें दो अदानी ग्रुप की हैं, जिनके नाम मुंद्रा सोलर एनर्जी, मुंद्रा सोलर PV बताये जाते हैं।
अन्य देशों की कंपनियों पर भी कार्रवाई की आंच
एक जापानी कंपनी की भारतीय इकाई है और एक सलूजा परिवार की है। इनके नाम हैं, प्रीमियर एनर्जी और कोवा (Kowa)। सूत्रों के अनुसार भारत की इन कंपनियों के अलावा लाओस और इंडोनेशिया की कुछ कंपनियों पर भी जाँच चल रही है। अंतिम निर्णय 75 दिन के भीतर आने की संभावना है। अमेरिकी कॉमर्स विभाग की वेबसाइट पर जारी एक फैक्ट शीट के अनुसार एजेंसी ने भारत से होने वाले आयात पर 123.04%, इंडोनेशिया से होने वाले आयात पर 35.17% और लाओस से होने वाले आयात पर 22.46% की प्रारंभिक शुल्क दरें (जिन्हें 'डंपिंग मार्जिन' के नाम से जाना जाता है। तय की हैं।
अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की बढ़ीं मुश्किलें
अमरिका की इस कार्रवाई से अमेरिकी बाजार में भारतीय सोलर उत्पादों के लिए दरवाजे लगभग बंद हो सकते हैं। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो सकता है और अहम एक्सपोर्ट मार्केट में शिपमेंट पर और रोक लग सकती है। हालांकि, इसका तुरंत असर शायद कम ही हो। कारण है कि कंपनियों ने अपने कारोबार को अलग-अलग जगहों पर फैला लिया है।
सस्ते दामों पर बिक्री का लगाया आरोप
अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा एंटी-डम्पिंग ड्यूटी लगाने के आदेश में कहा गया है कि भारत से निर्यात हो रहे सोलर उत्पाद अमेरिकी बाजार में कथित तौर पर कम कीमत पर बेचे जा रहे थे। इससे वहां के घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा था। इसी आधार पर यह कड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने यह भी कहा कि लिक्विडेशन पर रोक उस ऑर्डर के पब्लिश होने से 90 दिन पहले तक के शिपमेंट पर भी लागू होगी।
कुल टैरिफ 200% के पार, निर्यात पर असर
इस नई ड्यूटी के जुड़ने से पहले से लागू 125% से ज्यादा की काउंटरवेलिंग ड्यूटी और बढ़ गई है। इससे भारतीय सोलर एक्सपोर्ट पर कुल टैरिफ का बोझ 200% से भी ज्यादा हो गया है। इससे अमेरिका को शिपमेंट भेजना अब फायदे का सौदा नहीं रह गया है। इंडस्ट्री के अधिकारियों ने ईटी को यह जानकारी दी।
US सोलर बाजार में बड़ा झटका
अमेरिका के सरकारी ट्रेड आंकड़ों के अनुसार पिछले साल इन तीनों देशों का US सोलर आयात में 4.5 अरब डॉलर का हिस्सा था जो कुल आयात का लगभग दो-तिहाई है। यह फैसला उन देशों के उत्पादकों के लिए एक बड़ा झटका है जो तेज़ी से बढ़ते US बाजार में सामान की आपूर्ति कर रहे थे।
इंडस्ट्री ने फैसले को चुनौती देने के दिए संकेत
इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के सेक्रेटरी जनरल अमित मनोहर ने कहा कि इंडस्ट्री इस कदम को आगे भी चुनौती देगी। उन्होंने कहा, 'हम अंतिम फैसले और ITC की कार्यवाही के जरिए इसका विरोध करेंगे। हमें उम्मीद है कि नतीजा हमारे पक्ष में ही आएगा।'
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