देश के मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और उलेमाओं को राष्ट्रगीत बंदेमातरम नहीं सुहा रही है। वे इस पर खुली आपत्ति भी जता रहे हैं।
दूसरे की देवी-देवताओं की इबादत नहीं: मदनी
बोले, उनके मजहबी विश्वास के खिलाफ
सहारनपुर। देश के मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और उलेमाओं को राष्ट्रगीत बंदेमातरम नहीं सुहा रही है। वे इस पर खुली आपत्ति भी जता रहे हैं। पहले भी कई जनप्रतिनिधि मोहम्मद आजम खां, शफीकुर रहमान वर्क और पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद संसद में इसके गायन को लेकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसपर जोर देने के बाद फिर से यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
इस बीच, पूर्व सांसद दारूल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य एवं जमीयत उलमाए हिंद के एक गुट के हाल ही में फिर से चुने गए अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक भेंटवार्ता में मुसलमानों की आपत्ति के बारे में दो टूक कहा कि वंदे मातरम गीत में कुछ पंक्तियां ऐसी है जिनमें मातृभूमि को देवी दुर्गा के रूप में पेश कर उसकी पूजा वंदना के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का ईश्वर एक है, इस विश्वास को मानने वाले हैं और उसी की इबादत करते हैं। इसलिए दूसरे की देवी देवताओं की इबादत करना उनके मजहबी विश्वास के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री लगातार जोर दे रहे
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना को डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंदे मातरम गीत को पूरा का पूरा प्रस्तुत किया जाए और उसके जिन अंशों को पूर्व में हटाया गया था, उन्हें भी उसमें शामिल किया जाए।
यह भी पड़ेंः
कंपनी बदलते ही अब खुद शिफ्ट हो जाएगा पीएफ का पैसा
https://www.primenewsnetwork.in/india/pf-money-will-now-be-automatically-transferred-as-soon-as-the-company-changes/97064