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पश्चिम बंगाल: वोटर सुनवाई, सतर्कता बढ़ी

पश्चिम बंगाल में 27 दिसंबर से वोटरों की सुनवाई, सूक्ष्म पर्यवेक्षक तैनात, प्रमाण पत्रों की जांच में सतर्कता

पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत वोटरों की सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू होगी। राज्य के जिन वोटरों के नामों का मिलान 2002 की वोटर लिस्ट से नहीं हो पाया है, उनकी सुनवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में 27 दिसंबर से वोटरों की सुनवाई सूक्ष्म पर्यवेक्षक तैनात प्रमाण पत्रों की जांच में सतर्कता

West Bengal Election |

पश्चिम बंगाल में वोटरों की सुनवाई 27 दिसंबर से

पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत वोटरों की सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू होगी। राज्य के जिन वोटरों के नामों का मिलान 2002 की वोटर लिस्ट से नहीं हो पाया है, उनकी सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा जिन वोटरों को लेकर चुनाव आयोग को संदेह है, उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान तैनात रहेंगे सूक्ष्म पर्यवेक्षक

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग द्वारा तैनात सूक्ष्म पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे। इन्हें पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा, उसके बाद विभिन्न इलाकों में तैनात किया जाएगा।

सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को लेकर बयानबाजी

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से दावा किया गया है कि तैनात किए गए सूक्ष्म पर्यवेक्षक किसी दूसरे राज्य के नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के ही हैं। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा सूक्ष्म पर्यवेक्षक दूसरे राज्यों से लाए गए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि इन पर्यवेक्षकों को न तो बंगाल की भाषा आती है और न ही यहां के लोगों के बारे में जानकारी है। इस पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

साढ़े चार हजार से ज्यादा सूक्ष्म पर्यवेक्षक तैनात

मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के मुताबिक राज्य में करीब साढ़े चार हजार सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है।

31 लाख से अधिक वोटरों की होगी सुनवाई

मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिन वोटरों के नामों का मिलान 2002 की वोटर लिस्ट से नहीं हो पाया है, ऐसे वोटरों की संख्या 31 लाख 68 हजार से अधिक है। इन सभी वोटरों की सुनवाई की जाएगी।

सरकारी भवनों में ही होगी सुनवाई

चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि वोटरों की सुनवाई केवल सरकारी भवनों में ही कराई जाए। जिलाधिकारी, एसडीओ, बीडीओ समेत अन्य सरकारी कार्यालयों में सुनवाई होगी। जरूरत पड़ने पर सरकारी स्कूल या कॉलेज में भी सुनवाई कराई जा सकती है।

हर विधानसभा क्षेत्र में 15 अधिकारी रहेंगे मौजूद

हर विधानसभा क्षेत्र में ईआरओ, एईआरओ समेत करीब 15 अधिकारी वोटरों की सुनवाई करेंगे। सुनवाई के दौरान सूक्ष्म पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे।

प्रमाण पत्रों की जांच में बरती जाएगी सख्ती

सूत्रों के मुताबिक सुनवाई के समय वोटरों द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमाण पत्रों की जांच चुनाव आयोग के तय दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। चुनाव आयोग को शिकायत मिली है कि राज्य सरकार के कुछ कार्यालयों द्वारा जल्दबाजी में जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और आवास प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, जिनमें गड़बड़ी की आशंका है।

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