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एस जयशंकर बोले - ईरानी युद्धपोत को अनुमति...

भारत ने ईरानी युद्धपोत को डॉक करने की क्यों दी थी अनुमति? एस जयशंकर ने बताया

Raisina Dialogue : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है...

भारत ने ईरानी युद्धपोत को डॉक करने की क्यों दी थी अनुमति एस जयशंकर ने बताया

भारत ने ईरानी युद्धपोत को डॉक करने की क्यों दी थी अनुमति? एस जयशंकर ने बताया |

Raisina Dialogue : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है. हमने ईरानी जहाज को डॉक करने की अनुमति दे दी. वे रायसीना डायलॉग 2026 में बोल रहे थे. 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि "भारत संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है. हमें ईरानी पक्ष से मैसेज मिला था कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमाओं के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता था. वे बता रहे थे कि उन्हें कुछ तकनीकी समस्याएं आ रही हैं. 1 मार्च को हमने उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी, लेकिन उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर वे कोच्चि में डॉक हुए. उनमें कई युवा कैडेट थे."

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र एक इकोसिस्टम है. हिंद महासागर, दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले कहीं ज्यादा, रिकवरी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में है. अलग-अलग देश ऐसा कर रहे हैं, लेकिन पूरा क्षेत्र, ट्रेड पैटर्न की बहाली, कनेक्टिविटी. हिंद महासागर के इस पूरे पुनर्निर्माण प्रक्रिया को पहचानने की जरूरत है. इसमें बहुत मेहनत लगती है. पिछले दशक में इंडियन डिप्लोमेसी ने इस प्रक्रिया में बहुत निवेश किया है.

"श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी"

उन्होंने कहा कि "जब जहाज रवाना हुए थे और जब वे यहां पहुंचे तो स्थिति बिल्कुल अलग थी. वे बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए. जाहिर है, श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, उन्होंने जो निर्णय लिया, उसमें से एक दुर्भाग्यवश बच नहीं पाया. हमने कानूनी मुद्दों से परे मानवता के दृष्टिकोण से स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया."

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