प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

ब्रह्मोस की ताकत से दुनिया हैरान

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया ने ब्रह्मोस की ताकत देखी, MD जयतीर्थ जोशी बोले- यह भारत का बेमिसाल हथियार

ब्रह्मोस MD जयतीर्थ जोशी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल के बाद मिसाइल की ताकत दुनिया ने देखी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया ने ब्रह्मोस की ताकत देखी md जयतीर्थ जोशी बोले- यह भारत का बेमिसाल हथियार

World Amazed by BrahMos Missile Power |

नई दिल्ली [भारत]: ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD और CEO) डॉ. जयतीर्थ जोशी ने गुरुवार को ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा कि इस मिसाइल प्रणाली ने लंबे समय से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में लक्ष्यों पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने के बाद इसने आधुनिक युद्ध में अपनी क्षमता साबित की है। ऑपरेशन के दौरान मिसाइल की तैनाती के बाद दुनिया की सोच में आए बदलाव से जुड़े सवाल पर डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस ने मुश्किल और अत्यधिक तीव्रता वाले युद्ध में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इससे वैश्विक स्तर पर इस मिसाइल प्रणाली को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। उन्होंने कहा, "दुनिया हमेशा से ब्रह्मोस को हैरानी और आश्चर्य से देखती रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस बेहद उपयोगी मिसाइल ने साबित कर दिया है कि यह आधुनिक युद्ध के जटिल, बहु-क्षेत्रीय और अत्यधिक तीव्रता वाले माहौल के लिए एक बेहतर और घातक प्रणाली है।" डॉ. जोशी के मुताबिक, भारत के प्रमुख प्रथम प्रहार वाले हथियार के रूप में ब्रह्मोस ने अपनी ताकत और क्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल गोपनीयता, गति और फुर्ती बनाए रखते हुए दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है।

भारत की रक्षा ताकत और निर्यात में ब्रह्मोस की अहम भूमिका

डॉ. जोशी ने ब्रह्मोस को आत्मनिर्भर भारत की ताकत, सटीकता और गौरव का प्रतीक बताया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने इस हथियार प्रणाली का सक्रिय युद्ध में इस्तेमाल किया था। नूर खान जैसे पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस सहित अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमलों के जरिए इसकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात में भी अहम भूमिका निभा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात 62.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

2022 में मिला पहला निर्यात ऑर्डर

ब्रह्मोस की निर्यात सफलता पर डॉ. जोशी ने कहा कि इसकी कहानी वर्ष 2025 में युद्ध में इस्तेमाल होने से पहले ही शुरू हो गई थी। वर्ष 2022 में भारत को इस मिसाइल के लिए पहला बड़ा निर्यात ऑर्डर मिला था, जिसने वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की संभावनाओं को मजबूत किया। उन्होंने कहा, "आज ब्रह्मोस भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे है। एक प्रमुख उत्पाद के रूप में इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने लगातार अपने निर्यात का दायरा बढ़ाया है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और युद्ध में इस्तेमाल से अपनी उपयोगिता साबित करने के बाद इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है।" डॉ. जोशी के अनुसार, फिलीपींस के साथ पहली निर्यात डील के बाद भारत ने इस साल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो अन्य देशों के साथ भी समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है और भविष्य में निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम तक बढ़ेगा निर्यात

ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम को मिलने वाले ऑर्डर और डिलीवरी के साथ मिसाइल से जुड़े निर्यात का मूल्य 600 मिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस की भविष्य की प्रमुख परियोजनाओं में ब्रह्मोस-NG यानी अगली पीढ़ी की मिसाइल शामिल है। यह मौजूदा मिसाइल की तुलना में छोटी, हल्की और अधिक स्टील्थ क्षमता वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल होगी। इस परियोजना को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया कंपनी मिलकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस के माध्यम से विकसित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भारत की हवा से हमला करने की क्षमता को और मजबूत करना है। डॉ. जोशी ने कहा कि पहला प्रोटोटाइप 2027 या 2028 तक तैयार करने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नई प्रणाली में स्वदेशी तकनीक और सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, जिसके लिए बड़े स्तर पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हम 2027 या 2028 तक पहला प्रोटोटाइप विकसित कर लेंगे। इस नई प्रणाली में अधिक स्वदेशी सामग्री और कई नई तकनीकों व उन्नत सामग्रियों का इस्तेमाल होगा। इसलिए हमें बड़े पैमाने पर अनुसंधान एवं विकास का काम करना होगा। हमने अपनी योजनाएं बना ली हैं और इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल यह विकास के चरण में है।"

1,500 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल पर भी काम की योजना

ब्रह्मोस एयरोस्पेस की भविष्य की योजनाओं में 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाला स्ट्राइक संस्करण भी शामिल है। डॉ. जोशी ने बताया कि मिसाइल की रेंज बढ़ाने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि जमीन, समुद्र और हवा से किए गए परीक्षणों के दौरान मिसाइल की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमताओं को परखा गया है और इसकी शुरुआती 290 किलोमीटर की मारक सीमा से आगे की क्षमता पर काम किया गया है। डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि 1,500 किलोमीटर की रेंज अभी भविष्य की योजना का हिस्सा है और यह परियोजना फिलहाल शुरुआती अवधारणा के चरण में है। मिसाइल प्रणाली में आगे के सुधारों को लेकर संयुक्त उद्यम के रूसी साझेदार के साथ बातचीत भी चल रही है।

भारतीय नौसेना के लिए ब्रह्मोस प्रणाली का नया अनुबंध

इस बीच, 6 अक्टूबर को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर की खरीद को लेकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) सहित विभिन्न भारतीय उद्योगों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें: औरंगाबाद सांसद अभय कुशवाहा का केंद्र पर हमला, बोले- नक्सलवाद खत्म तो Z+ और Y+ सुरक्षा किस बात की?

Related to this topic: