आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित द्वितीय ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन मंदिर अपनी भव्यता, धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण के कारण देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश)। भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में दूसरे स्थान पर माने जाने वाले मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित है। यह तीर्थ इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहां भगवान शिव मल्लिकार्जुन स्वामी और माता भ्रमराम्बा देवी एक ही परिसर में विराजमान हैं। यह स्थान 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ 18 महाशक्तिपीठों में भी शामिल है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
कहां स्थित है मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग?
मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले के श्रीशैलम नगर में नल्लमाला पर्वतमाला और कृष्णा नदी के निकट स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ मनमोहक दृश्य भी प्रदान करता है।
कैसे पहुंचें?
हवाई मार्ग: निकटतम प्रमुख हवाई अड्डे हैदराबाद और विजयवाड़ा हैं। इनके अलावा कुर्नूल हवाई अड्डा भी अपेक्षाकृत निकट है। एयरपोर्ट से टैक्सी और बसों के माध्यम से श्रीशैलम पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड, नंद्याल और कुर्नूल हैं। इन स्टेशनों से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं श्रीशैलम के लिए उपलब्ध रहती हैं।
सड़क मार्ग: हैदराबाद, विजयवाड़ा, कुर्नूल और अन्य प्रमुख शहरों से राज्य परिवहन तथा निजी बसों की नियमित सेवा उपलब्ध है। सड़क मार्ग से श्रीशैलम की यात्रा नल्लमाला के जंगलों से होकर गुजरती है, जो बेहद रमणीय मानी जाती है।
ठहरने की व्यवस्था
श्रीशैलम में मंदिर देवस्थानम के अतिथि गृह, धर्मशालाएं, सत्रम (Satram), बजट होटल और निजी लॉज बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कमरे बुक कर सकते हैं। कई धर्मशालाओं में भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है। विशेष अवसरों जैसे सावन, महाशिवरात्रि और कार्तिक मास में पहले से बुकिंग कर लेना बेहतर रहता है।
दर्शन के साथ इन स्थानों को भी देखें
मल्लिकार्जुन मंदिर के दर्शन के बाद श्रद्धालु भ्रमराम्बा देवी मंदिर, पाताल गंगा, साक्षी गणपति मंदिर, अक्का महादेवी गुफाएं, श्रीशैलम बांध और नल्लमाला टाइगर रिजर्व की यात्रा भी कर सकते हैं। ये स्थान धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टि से बेहद आकर्षक हैं।
यात्रा के लिए जरूरी सुझाव
यदि आप सावन, महाशिवरात्रि या किसी बड़े पर्व के दौरान यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो होटल और दर्शन की बुकिंग पहले से कर लें। मंदिर परिसर में सुरक्षा नियमों का पालन करें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का अनुसरण करें। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और भारतीय संस्कृति का अद्भुत अनुभव भी है। यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का विशेष अनुभव लेकर लौटता है।
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