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सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की कामना की

सोमवती अमावस्या पर दुर्लभ संयोग, सौभाग्य-समृद्धि के लिए श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी

सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाते हुए सूर्य को अर्घ दिया।

सोमवती अमावस्या पर दुर्लभ संयोग सौभाग्य-समृद्धि के लिए श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी

नर्मदा में डुबकी लगा कर सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु |

डिंडोरी (मध्य प्रदेश): सोमवती अमावस्या पर ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) और सोमवार का दुर्लभ संयोग आज बना है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या तिथि और सोमवार का यह मेल 100 वर्षों बाद एक अत्यंत शुभ योग के रूप में आया है, जो अखंड सौभाग्य, पितृ कृपा और आर्थिक समृद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। 

सोमवती अमावस्या का विधान (नियम)- 'स्नान और दान'

सोमवती अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान का विशेष महत्व है। यदि इन नदियों में से कहीं जाना संभव न हो, तो घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं (जैसे चावल, चीनी, दूध और साबूदाना) दान करना चाहिए। 

पीपल वृक्ष की परिक्रमा

सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-सौभाग्य की कामना के लिए पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा भी करती हैं। परिक्रमा के दौरान पेड़ पर सूत (कलावा) भी लपेटा जाता है।

पितरों का तर्पण

सोमवती अमावस्या के दिन पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए उत्तम माना जाता है। सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, काले तिल और फूल डालकर 'ॐ पितृ देवताभ्यो नमः' मंत्र का जाप करते हुए पितरों को तर्पण देना चाहिए। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसमें त्रिदेवों का वास माना जाता है। महिलाएं दिनभर उपवास रखकर कथा सुनती हैं। 

डिंडोरी में उमड़े श्रद्धालु

जिला मुख्यालय के डेम घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। आसपास के इलाकों से यहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाते हुए सूर्य को अर्घ दिया। सुहागन महिलाओं ने विधि विधान से पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने के साथ परिक्रमा कर कन्या पूजन किया और सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त किया।
 

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