गुरु पूर्णिमा 2026 गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रति सम्मान व्यक्त करने का पवित्र अवसर है, जिसमें लोग अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
Guru Purnima 2026: A Sacred Festival Celebrating Respect and Gratitude Towards Gurus |
नई दिल्ली,(भारत)। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है। यह दिन उन सभी गुरुओं, शिक्षकों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित माना जाता है, जिन्होंने अपने ज्ञान से जीवन को सही दिशा दी। यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
गुरु शब्द का गहरा आध्यात्मिक अर्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'गुरु' शब्द का गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। इसमें 'गु' का अर्थ अज्ञान या अंधकार तथा 'रु' का अर्थ उस अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला होता है। वहीं, पूर्णिमा पूर्णता, शुद्धता और प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है। इस प्रकार गुरु पूर्णिमा का संदेश है कि गुरु अपने ज्ञान से जीवन के अंधकार को दूर कर व्यक्ति को सही मार्ग दिखाते हैं।
आज के दिन ही हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म
इस दिन का विशेष महत्व महर्षि वेद व्यास से भी जुड़ा है। मान्यता है, कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महर्षि व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसी कारण इस तिथि को व्यास पूर्णिमा कहा जाता है और उन्हें आदिगुरु के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान
गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का भी प्रतीक है। इस अवसर पर विद्यार्थी अपने शिक्षकों का आशीर्वाद लेते हैं, जबकि आध्यात्मिक साधक अपने गुरु का पूजन कर उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। यह पर्व समाज को ज्ञान, संस्कार और सदाचार के महत्व का संदेश देता है तथा जीवन में गुरु के स्थान को सर्वोच्च मानने की प्रेरणा देता है।
यह भी पढ़ेंः NEET प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करेगी बंगाल सरकार, आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर रहेगी नजर