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ज्योतिर्लिंगों की महिमा

सावन 2026 में करें द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, जानें 12 शिवधामों का धार्मिक महत्व

सावन के पवित्र महीने में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और भगवान शिव की आराधना को अत्यंत शुभ माना जाता है, जहां श्रद्धालु आस्था और भक्ति के साथ शिवधामों की यात्रा करते हैं।

सावन 2026 में करें द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा जानें 12 शिवधामों का धार्मिक महत्व

Dwadasa Jyotirlinga Yatra |

नई दिल्ली,(भारत)। भगवान शिव का प्रिय सावन महीना शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है, कि इस पवित्र मास में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शिव पुराण के अनुसार, भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दिव्य प्रकाश स्वरूप माने जाते हैं और इनकी यात्रा मोक्षदायिनी मानी गई है। आप अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा कर सकते हैं, लेकिन परंपरागत रूप से यात्रा की शुरुआत गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से करना शुभ माना जाता है। इसके बाद क्रमशः मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर के दर्शन किए जा सकते हैं।

1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (सोमनाथ, गुजरात)

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ को पहला स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि चंद्रदेव ने यहां भगवान शिव की तपस्या कर श्राप से मुक्ति पाई थी। यह मंदिर आस्था, पुनर्निर्माण और सनातन संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।

2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश)

यह मंदिर शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक है। इसे ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ शक्तिपीठ का भी सम्मान प्राप्त है। भगवान कार्तिकेय के रूठ कर कैलाश छोरने के बाद उन्हे मानने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती यहाँ आए थे।

3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश)

महाकालेश्वर विश्व का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहां होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा, मध्य प्रदेश)

नर्मदा नदी के बीच 'ॐ' आकार के द्वीप पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां दर्शन से मन को शांति और आत्मिक बल प्राप्त होने की मान्यता है।

5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड)

हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ सबसे ऊंचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग है। महाभारत के अनुसार, पांडवों ने यहीं भगवान शिव की आराधना कर अपने पापों से मुक्ति मांगी थी।

6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (पुणे, महाराष्ट्र)

सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित यह ज्योतिर्लिंग उस स्थान से जुड़ा है जहां भगवान शिव ने राक्षस भीम का संहार किया था। यह प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।

7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

मोक्ष की नगरी काशी में स्थित यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध धाम माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति मिलती है।

8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र)

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु की संयुक्त शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यहां कालसर्प दोष निवारण के लिए भी विशेष पूजा कराई जाती है।

9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (देवघर, झारखंड)

मान्यता है कि भगवान शिव यहां वैद्य यानी चिकित्सक के रूप में विराजमान हैं। सावन में यहां लाखों कांवड़िये गंगाजल चढ़ाने पहुंचते हैं।

10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारका, गुजरात)

यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के नागों के स्वामी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां पूजा करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (रामेश्वरम, तमिलनाडु)

रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। इसलिए यह मंदिर शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं में अत्यंत पूजनीय है।

12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (औरंगाबाद, महाराष्ट्र)

एलोरा गुफाओं के निकट स्थित यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम माना जाता है। यहां दर्शन करने से पारिवारिक सुख और समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।


यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सावन में प्रतिदिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा एवं भस्म अर्पित करें। यदि पूरे सावन में सभी ज्योतिर्लिंगों की यात्रा संभव न हो, तो निकट के शिव मंदिर में श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और शिव आराधना करने से भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

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